नवरात्रि के सातवें दिन यानी सप्तमी की रात को मां कालरात्रि देवी का पूजन किया गया। नवरात्रि के दौरान यह दिन बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। पुराणों के अनुसार सप्तमी का दिन खास होता है। मां कालरात्रि का स्वरूप काजल के समान काला होता है, लेकिन यह रूप भक्तों के लिए बहुत दयालु माना जाता है। मां अलग-अलग आयुधों के साथ विराजमान रहती हैं और भक्तों के अकाल मृत्यु के संकट को दूर कर उनके दुख हरती हैं।
महा निशा पूजन को लेकर शहर के अलग-अलग मंदिरों में रात 12 बजे के बाद श्रद्धालुओं ने पूजा की। मुजफ्फरपुर के रामदयालू नगर चौक स्थित माता मनोकामना मंदिर में रात 11 बजे से ही भक्तों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई। श्रद्धालु मां के दर्शन और पूजन कर अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति की कामना करते दिखे। नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की उपासना को विशेष महत्व दिया जाता है।
शहर के सिकंदरपुर चौक स्थित माता काली मंदिर, जूरन छपरा के महेश बाबू चौक स्थित महामाया स्थान मंदिर, दुर्गा स्थान मंदिर, माता राजराजेश्वरी देवी मंदिर और बगलामुखी मंदिर में भी देर रात तक पूजा की गई। इस दौरान बड़ी संख्या में भक्तों ने मां का पूजन किया और पुरोहितों ने विधिविधान से पूजा संपन्न कराई।
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मनोकामना मंदिर के पुजारी राजीव झा ने बताया कि मां कालरात्रि की पूजा से अकाल मृत्यु का संकट दूर हो जाता है। देवी पुराण में इसका विशेष उल्लेख मिलता है। इस पूजा में शामिल होने से भक्त की दिव्यता और आध्यात्मिक ऊर्जा बढ़ती है। मां कालरात्रि की पूजा हमेशा पूरे विधिविधान से करनी चाहिए, तभी उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।
परंपरा के अनुसार मां के चरणों में गुड़हल के फूल, लाल चुनरी, नारियल, केला, सेब, अन्य फल, मिष्ठान, सिंदूर, रोली, इत्र और द्रव्य पदार्थ चढ़ाना बहुत शुभ और फलदायी माना जाता है। मां कालरात्रि का यह रूप बेहद दयालु और करुणामयी माना गया है।