मुजफ्फरपुर जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने मानवता को एक बार फिर शर्मसार कर दिया। साहेबगंज थाना क्षेत्र के नगर परिषद साहेबगंज के वार्ड-11 के पाए में स्थित तिरहुत वैशाली नहर पुल के नीचे एक अर्ध निर्मित नवजात शिशु का शव बरामद हुआ है। नवजात का शव काले प्लास्टिक और कपड़े में लपेटकर नहर के पेटी में फेंका गया था, जिसे देखकर स्थानीय लोग आक्रोशित हो उठे।
घटना से पूरे इलाके में सनसनी
जैसे ही शव की जानकारी मिली, घटनास्थल पर स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जुट गई। शव की स्थिति को देखकर लोगों की आंखें नम हो गईं, वहीं इस अमानवीय घटना के प्रति गुस्सा भी साफ नजर आया। लोगों का कहना है कि यह घटना केवल एक मासूम की हत्या नहीं, बल्कि समाज और व्यवस्था पर भी एक गहरा सवाल है।
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अवैध अल्ट्रासाउंड और नर्सिंग होम पर उठे सवाल
स्थानीय निवासियों ने इस घटना के बाद अवैध अल्ट्रासाउंड केंद्रों और अवैध नर्सिंग होम पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि भले ही सरकार भ्रूण परीक्षण और गर्भपात पर सख्त कानून लागू कर चुकी हो, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग है। इलाके में अब भी अवैध अल्ट्रासाउंड और नर्सिंग होम धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं, जहां भ्रूण का लिंग परीक्षण किया जाता है और अवैध तरीके से गर्भपात कराए जाते हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन अवैध केंद्रों में मनमानी फीस लेकर अवैध गर्भपात कर शवों को इस तरह फेंका जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा समय-समय पर जांच की बात तो की जाती है, लेकिन वास्तव में कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित रहती है। ऐसे में इस तरह की घटनाएं इन केंद्रों की लापरवाही और प्रशासनिक चुप्पी की बड़ी गवाही बनकर सामने आ रही हैं।
दर्ज नहीं हुई कोई शिकायत
घटना की सूचना मिलते ही साहेबगंज थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया कि अब तक इस मामले में किसी की ओर से कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। पुलिस का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा यदि जांच और कार्रवाई के निर्देश मिलते हैं, तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भ्रूण परीक्षण और अवैध गर्भपात कानूनन अपराध है और लिखित शिकायत मिलने पर आगे की सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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प्रशासनिक उदासीनता पर उठे सवाल
घटना के बाद लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि प्रखंड स्तर पर ऐसे मामलों की केवल औपचारिक जांच की जाती है, जबकि अवैध केंद्रों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। इससे यह साफ है कि जब तक प्रशासन गंभीरता से इन मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेगा, तब तक ऐसी घटनाओं पर रोक लगाना मुश्किल है।