मुजफ्फरपुर जिले में औराई, कटरा और गायघाट प्रखंड क्षेत्र में बागमती नदी का कहर जारी है। बागमती नदी अभी खतरे के निशान से करीब डेढ़ मीटर ऊपर बह रही है। नेपाल के तराई इलाकों में हुई लगातार बारिश का सीधा असर अब और गंभीर हो गया है। बागमती नदी मुख्य रूप से कटरा प्रखंड क्षेत्र की कई पंचायतों को अपने आगोश में ले चुकी है। बागमती नदी के तेजी से बढ़ रहे जलस्तर ने अब नए इलाकों में प्रवेश कर ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। कटरा प्रखंड क्षेत्र की बर्री पंचायत, बसघट्टा पंचायत, कटरा पंचायत और गंगिया के निचले इलाकों में पानी से बाढ़ का संकट गहरा गया है।
जिला प्रशासन के आपदा प्रबंधन विभाग की आधिकारिक वायर गेज रिपोर्ट के मुताबिक, कटौझा में बागमती का जलस्तर 56.30 मीटर दर्ज किया गया, जबकि बेनीबाद में यह 49.92 मीटर दर्ज किया गया है, जो खतरे के निशान से करीब डेढ़ मीटर ऊपर है। जलस्तर में हुई इस भारी बढ़ोतरी से तबाही का मंजर देखने को मिल रहा है।
कटरा की पंचायतों में हालात गंभीर, 200 से ज्यादा परिवार प्रभावित
कटरा प्रखंड की बसघट्टा और बर्री पंचायत में नदी के पानी में बढ़ोतरी से स्थिति अत्यंत गंभीर हो गई है। यहां के लगभग 200 से अधिक परिवार बाढ़ के पानी की सीधी चपेट में हैं। विशेष रूप से बकुची, नवादा, अंडमा और बर्री गांव का संपर्क मुख्य मार्गों से कट गया है और पूरा इलाका जलमग्न हो चुका है। इसके साथ ही बागमती नदी मुख्य रूप से कटरा, औराई और गायघाट प्रखंड क्षेत्रों से होकर बहती है, जिसके कारण अब इन प्रखंडों के निचले इलाकों में रहने वाली एक बड़ी आबादी पर बेघर होने का बड़ा खतरा मंडरा रहा है।
ग्रामीणों में दहशत, नाव की व्यवस्था नहीं होने का आरोप
स्थानीय ग्रामीण बाढ़ को लेकर दहशत में हैं। ग्रामीण मिंटू कुमार कहते हैं कि अभी तक प्रशासन की ओर से नाव तक की व्यवस्था नहीं की गई है। हम लोग गांव के लोगों की नाव से आना-जाना कर रहे हैं। स्थिति बेहद खराब हो गई है। ग्रामीण आशा देवी बताती हैं कि बीते तीन दिनों में अचानक बागमती नदी के पानी का बहाव बेहद तेज हुआ है और जलस्तर में कोई कमी नहीं आ रही है। बाढ़ का पानी अब गांवों की मुख्य सड़कों, रिहायशी मकानों और सरकारी स्कूलों के अंदर तक भर गया है। स्थिति इतनी दयनीय हो चुकी है कि लोग अपनी जान और मवेशियों को बचाने के लिए ऊंचे बांधों या अपने पक्के घरों की छतों पर तिरपाल डालकर रहने को मजबूर हैं। बच्चों और महिलाओं को सबसे ज्यादा दिक्कत हो रही है। स्कूल तक बंद हैं और ऐसा लग रहा है कि गांव के लोग जल कैदी बन गए हैं।
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चौकी के ऊपर चौकी जोड़कर खाना बनाने को मजबूर
स्थानीय ग्रामीण बबीता देवी ने कहा कि हमारे और आसपास के कई घरों के भीतर पानी घुस चुका है। हम लोग चौकी के ऊपर दूसरी चौकी जोड़कर किसी तरह उस पर खाना बना रहे हैं और रात काट रहे हैं।ग्रामीणों का कहना है कि अब तक इस विकट परिस्थिति में कोई प्रशासनिक अधिकारी या स्थानीय जनप्रतिनिधि उनकी सुध लेने नहीं आया है, जिससे वे खुद को बेबस महसूस कर रहे हैं। अब तो गंगा मैया से गुहार लगा रहे हैं कि आप अब लौट जाएं, ताकि हम ग्रामीण फिर से खुशहाली से रह सकें।