बिहार के शिक्षा विभाग की ऑनलाइन वेतन भुगतान प्रणाली (एचआरएमएस) में कथित सेंधमारी कर सरकारी खजाने से 60 लाख 57 हजार 158 रुपये की अवैध निकासी का मामला सामने आया है। विभागीय जांच में दो लोगों की भूमिका प्रथमदृष्टया संदिग्ध पाए जाने के बाद मोतिहारी नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। आरोप है कि तकनीकी छेड़छाड़ कर सरकारी राशि निजी बैंक खातों में भेजी गई। इस खुलासे के बाद शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था, वेतन भुगतान प्रक्रिया और कार्यालय में कथित संरक्षण को लेकर सवाल उठने लगे हैं। अब जांच में यह भी पता लगाया जाएगा कि गड़बड़ी में अन्य कर्मचारियों या अधिकारियों की कोई भूमिका थी या नहीं।
जून 2024 से सितंबर 2026 के बीच सरकारी राशि की निकासी
शिक्षा विभाग, बिहार के निदेशक प्रशासन के पत्रांक 2072, दिनांक 12 अक्टूबर 2026 के निर्देश पर शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मचारियों के एचआरएमएस वेतन भुगतान की विशेष जांच कराई गई थी। जांच के दौरान जून 2024 से सितंबर 2026 के बीच सरकारी राशि की अवैध निकासी का मामला सामने आया। इसके बाद विभागीय स्तर पर कार्रवाई करते हुए मोतिहारी नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई। मामले में कुल 60 लाख 57 हजार 158 रुपये के गबन का आरोप है। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस अब पूरे मामले की पड़ताल कर रही है। यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि वेतन भुगतान प्रणाली में कथित तौर पर किस तरह छेड़छाड़ की गई और सरकारी राशि किन खातों में भेजी गई।
शिक्षक और एचआरएमएस ऑपरेटर की भूमिका संदिग्ध
विभागीय जांच के अनुसार, मदरसा मिसवाहुल उलूम, सेमरहियां, छौड़ादानों में कार्यरत शिक्षक मो. इमादुद्दीन शाबिर उर्फ बेताब और एचआरएमएस ऑपरेटर अमन कुमार की भूमिका प्रथमदृष्टया संदिग्ध पाई गई है। आरोप है कि ऑनलाइन वेतन भुगतान प्रणाली में तकनीकी छेड़छाड़ कर सरकारी राशि निजी बैंक खातों में ट्रांसफर की गई। जांच में इमादुद्दीन की पत्नी रोविना कौशल और अमन कुमार की मां सुमन के बैंक खातों का इस्तेमाल किए जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि, मामले में आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल पुलिस दर्ज प्राथमिकी के आधार पर मामले की जांच कर रही है।
प्रतिनियुक्ति रद्द होने के बाद भी कार्यालय में कैसे कर रहे थे काम?
इस मामले में अब जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) कार्यालय की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। सवाल है कि यदि संबंधित व्यक्ति की प्रतिनियुक्ति रद्द कर दी गई थी, तो बेताब जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय में किस आधार पर काम कर रहे थे?
डीईओ और डीएम से शिकायत के बाद क्या कार्रवाई हुई?
मामले में सामाजिक कार्यकर्ता नासिर की ओर से पहले भी शिकायत किए जाने का आरोप है। बताया गया है कि नासिर ने बेताब के खिलाफ दलाली और उगाही से संबंधित शिकायत जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) और जिलाधिकारी (डीएम) से की थी। जानकारी के अनुसार, जिलाधिकारी ने 10 अप्रैल 2026 को ज्ञापांक 134 के माध्यम से शिकायत आवेदन और साक्ष्य जांच के लिए डीईओ कार्यालय भेजे थे। इसके बावजूद उस समय शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई, यह अब जांच का अहम बिंदु बन गया है। जांच में यह भी स्पष्ट करना होगा कि शिकायत मिलने के बाद संबंधित अधिकारियों ने क्या कदम उठाए और मामले की पड़ताल किस स्तर तक पहुंची थी।
गबन के साथ शिकायत और भुगतान प्रक्रिया की जांच की मांग
मामला सामने आने के बाद अब सरकारी राशि की कथित अवैध निकासी के साथ-साथ शिकायतों पर हुई कार्रवाई, प्रतिनियुक्ति और वेतन भुगतान प्रक्रिया की भी जांच कराने की मांग उठ रही है। जांच के दायरे में यह पता लगाना जरूरी होगा कि एचआरएमएस प्रणाली में गड़बड़ी कैसे हुई, निजी खातों में राशि भेजने की प्रक्रिया में किन लोगों की भूमिका रही और निगरानी व्यवस्था में कहां चूक हुई। मांग की जा रही है कि यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की मिलीभगत अथवा लापरवाही प्रमाणित होती है, तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाए। फिलहाल दो लोगों की भूमिका प्रथमदृष्टया संदिग्ध बताई गई है और पुलिस मामले की आगे की जांच कर रही है।