आमतौर पर कारा यानी जेल को लोग एक यातना गृह के रूप में जानते आए हैं। बाद में समय के साथ सुविधाओं में इजाफा और बंदियों को मिलने वाली विशेष प्रशिक्षण और व्यवस्था ने इसे सुधार गृह बना दिया। अब तो यहां पर पढ़ाई, लिखाई और प्रशिक्षण तक हो रही है।
ऐसे में बिहार के बड़े जेलों में शुमार हुआ अमर शहीद खुदीराम बोस सेंट्रल जेल इससे भला अछूता कैसे रहे। इस जेल में बंद कैदी अपनी सजा तो जरूर काट रहे हैं। लेकिन उनके मन में गीत-संगीत और पसंद गानों से अब दूरी कम हो गई है, जिसके बाद अब तो इनके चेहरे पर मुस्कान भी बरकरार है। बस एक फरमाइश कीजिए और Radio Prison आपकी पसंद के गीत को सुना देगा।
इन दिनों सुर्खियों में है केंद्रीय जेल
इस केंद्रीय जेल में विभिन्न कांड में सजायाफ्ता बंदियों की अब फरमाइश चर्चित गीतकार गायक किशोर कुमार और मोहम्मद रफी से लेकर नए जमाने के कुमार सानू तक की सुरीली आवाज में गीत-संगीत के साथ में उठा रहे हैं। ये दरअसल मुजफ्फरपुर में स्थित अमर शहीद खुदीराम बोस सेंट्रल जेल में बीते वर्ष 2023 में रेडियो तरंग Radio Prison नाम से रेडियो की व्यवस्था लगवाई गई थी, जो एक बार फिर खूब चर्चा में है। इसके कारण से जेल के बंदी अब खूब शांति और धैर्य के साथ प्रेम और सौहार्द से रहते हैं।
बीते साल शुरू किया गया हुआ यह व्यवस्था और पूरे केंद्रीय जेल में पूरी तरह शुरू हो गया है और सुर्खियों बंटोर रहा है। और तो और अब इसमें रोजाना जेल में बंद कैदी अपने मनपसंद गानों की फरमाइश करते हैं और फिर जेल में मौजूद रेडियो जॉकी उनके पसंद के उस गाने को लगा देते हैं, जिसका लुफ्त उठाते हैं।
जेल अधीक्षक ने क्या कहा
इस व्यवस्था को लेकर अमर शहीद खुदीराम बोस सेंट्रल जेल सुप्रिटेंडेंट ब्रिजेश कुमार मेहता बताते हैं कि हमने जेल में बंदियों की हर तरह की सुविधाएं को उपलब्ध करवाने को कोशिश की है। इस जेल में पढ़ाई- लिखाई से लेकर रोजगार सृजन के लिए भी कई आयाम खोले हैं। अब तो जेल के रेडियो तरंग पर तीन तरह के कार्यक्रम प्रसारित किए जा रहे हैं। इसको हम सुबह 6:30 से 7:30 बजे तक नया सवेरा कार्यक्रम प्रसारित होता है, जिसमें विशेषकर बंदियों के लिए भक्ति संगीत, मधुर धुन के अलावा संखद संगीत और सूफी संगीत बजता है।
इसके बाद रेडियो पर कई सकारात्मक समाचार का भी प्रसारण किया जाता है। जबकि वहीं दोपहर 1:30 बजे से 02:30 तक सदाबहार नगमे का कार्यक्रम प्रसारण होता है, जिसमें चर्चित गीतकार के गाए हुए पुराने नगमे हिंदी गाने वाक्यांश कहानी और कविता भी प्रसारित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही कैदियों के मनपसंद गाने भी सुनाए जा रहे हैं। इससे बंदियों में देखा जा रहा है, उनको मानसिक रूप में शांति मिल रही है।
बॉक्स में देते हैं फरमाइश के गाने
जानकारी के अनुसार, जेल में बंद कैदी अपना मनपसंद गाना सुनने के लिए एक लेटर बॉक्स में अपनी फरमाइश लिखकर रखते हैं। इसे लेकर रेडियो जॉकी के पास दी जाती है, उसके बाद गाने को देखकर सुनाया जा रहा है। इससे बंद कैदी के चेहरे पर थोड़ी मुस्कान आती है। इस व्यवस्था को बीते ही वर्ष 2023 में तत्कालीन जिला अधिकारी प्रणव कुमार के द्वारा शुरू करवाया गया था, जिसके बाद यह सुविधा अब पूरी तरह सुचारू रूप से चल रही है। इस रेडियो में किसी भी आपत्तिजनक भाषा संदेश गाना आदि का कोई भी प्रसारण नहीं किया जाता है। जो भी अच्छे गाने और अच्छे संदेश होते हैं, उसी का प्रसारण किया जाता है।