राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित कांटी के एनटीपीसी चौक पर बहुप्रतीक्षित फ्लाइओवर, सर्विस लेन और नाला निर्माण का कार्य पूरी तरह ठप हो गया है। सड़क अलाइनमेंट के बीचों-बीच एक मंदिर आ जाने की वजह से सर्विस रोड की कनेक्टिविटी पूरी तरह बाधित है। सर्विस रोड पर गाड़ियों की आवाजाही शुरू नहीं हो पाने के कारण मुख्य फ्लाइओवर के एप्रोच पथ का निर्माण भी बीच में ही अटक गया है। इस गंभीर समस्या को देखते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के परियोजना निदेशक आशुतोष सिन्हा ने जिलाधिकारी को आधिकारिक पत्र भेजा है। पत्र में उन्होंने मंदिर के स्थानांतरण की प्रक्रिया पूरी कराने के लिए पर्याप्त संख्या में दंडाधिकारियों और पुलिस बल की तत्काल तैनाती करने का औपचारिक अनुरोध किया है।
ब्लैक स्पॉट की समस्या और निर्माण में रुकावट
एनटीपीसी चौक पर लगातार हो रहे भीषण सड़क हादसों के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने इस स्थान को खतरनाक ब्लैक स्पॉट के रूप में चिह्नित किया था। इस खतरनाक स्थिति को हमेशा के लिए समाप्त करने और यात्रियों के लिए यातायात को सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से ही यहां फ्लाइओवर, सर्विस लेन और नाले (ड्रेनेज) के निर्माण की परियोजना स्वीकृत कर काम शुरू कराया गया था।
हालांकि, वर्तमान में मुख्य सर्विस लेन के ठीक बीचों-बीच मंदिर अवस्थित होने के कारण वाहनों का डायवर्जन करना संभव नहीं हो पा रहा है। जब तक सड़क पर चलने वाले पूरे यातायात को सर्विस रोड पर स्थानांतरित नहीं कर दिया जाता, तब तक फ्लाइओवर के एप्रोच पथ का मुख्य निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ाया जा सकता है। इसके साथ ही सर्विस रोड का निर्माण रुकने से जल निकासी के लिए नाला बनाने और सड़क चौड़ीकरण का कार्य भी इसी गतिरोध के कारण पूरी तरह बंद पड़ा है।
पूर्व प्रशासनिक प्रयास और स्थानीय समन्वय
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के परियोजना निदेशक ने बताया कि इस महत्वपूर्ण परियोजना में आ रही बाधा के संबंध में पूर्व में भी प्रशासनिक स्तर पर पत्राचार किया जा चुका है। पहले अनुमंडल पदाधिकारी (पश्चिमी) को लिखित रूप से पत्र भेजकर पूरी समस्या से अवगत कराया गया था, लेकिन उस समय कोई ठोस प्रशासनिक समाधान सामने नहीं आ सका। इसके उपरांत एनएचएआई की तकनीकी टीम ने स्थानीय ग्रामीणों और मंदिर समिति के सदस्यों के साथ लगातार बैठकें करके बेहतर समन्वय स्थापित किया। ग्रामीणों के सहयोग से मंदिर के कुछ बाहरी निर्माण हिस्सों को हटवाया भी गया था। इसके बावजूद, भारी-भरकम निर्माण मशीनों के सुगम संचालन और सुचारू यातायात व्यवस्था बहाल करने के लिए वह जगह अब भी अपर्याप्त साबित हो रही है। पर्याप्त जगह न होने के कारण निर्माण एजेंसी और ठेकेदार काम आगे बढ़ाने में पूरी तरह असमर्थ हैं।
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नवंबर की समय-सीमा और सुरक्षा बल की मांग
इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना को पूरा करने की अंतिम समय-सीमा आगामी नवंबर माह तक तय की गई है। परियोजना निदेशक आशुतोष सिन्हा ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि यदि मंदिर के स्थानांतरण में थोड़ा भी और विलंब होता है, तो निर्धारित समय पर फ्लाइओवर का निर्माण पूरा करना पूरी तरह असंभव हो जाएगा। ऐसी स्थिति में परियोजना के अत्यधिक लटकने और दुर्घटनाओं का जोखिम निरंतर बने रहने की पूरी आशंका है। इन्हीं तमाम परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने जिला प्रशासन से अविलंब पर्याप्त सुरक्षा बल और दंडाधिकारी उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि मंदिर को किसी अन्य स्थान पर सफलतापूर्वक स्थानांतरित करके फ्लाइओवर तथा सर्विस रोड के निर्माण कार्य को युद्धस्तर पर दोबारा शुरू किया जा सके।