पूर्वी चंपारण के मोतिहारी स्थित बंद पड़ी हनुमान शुगर मिल एक बार फिर विवादों में घिर गई है। मिल की जमीन की बिक्री शुरू होने के बाद कर्मचारियों और किसानों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। उनका आरोप है कि करोड़ों रुपये बकाया होने के बावजूद उनके भुगतान के बजाय मिल की संपत्तियों की सौदेबाजी की जा रही है।
प्रशासन की भूमिका पर सवाल
स्थानीय लोगों का कहना हे कि इस पूरे मामले में प्रशासन की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। स्पष्ट न्यायालय आदेश के बावजूद यदि नियमों का उल्लंघन हो रहा है, तो जिम्मेदारी तय क्यों नहीं की जा रही है? इस मामले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों का बयान
इस संदर्भ में राजद के जिला प्रवक्ता सह गोड़वा पंचायत के मुखिया राजू बैठा ने बताया कि माननीय न्यायालय ने हर्षवर्धन बहेती को निजी जमीन बेचने का आदेश दिया है, न कि चीनी मिल की जमीन बेचने का। यह सरासर गलत है और इसकी जांच होनी चाहिए। वहीं, राजद के पूर्व विधायक राजेंद्र राम ने कहा कि बिहार में अंधी और बहरी सरकार है, जिसे न किसानों की चिंता है और न मजदूरों की। जिस चीनी मिल पर किसानों का करोड़ों रुपये बकाया है, उसी से जुड़े मामले में दो किसानों ने आत्मदाह तक कर लिया, और अब उसी जमीन को रोक सूची से मुक्त कर दिया गया है, जो सरासर गलत है। पूरे मामले की जांच होनी चाहिए कि आखिर यह फैसला किसके दबाव में लिया गया है, अन्यथा एक बार फिर आंदोलन किया जाएगा। वहीं इस संदर्भ में मोतिहारी के अपर समाहर्ता मुकेश कुमार सिन्हा ने बताया कि यह सारी प्रक्रिया माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार की जा रही है।
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