मोतिहारी की बंद पड़ी बारा चकिया चीनी मिल की जमीन की बिक्री पर एक बार फिर रोक लगा दी गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 17 जनवरी को समृद्धि यात्रा के दौरान मिल को दोबारा चालू करने की घोषणा की थी, लेकिन इससे पहले डीएम सौरभ जोरवाल के आदेश पर मिल की करीब 60 एकड़ जमीन की बिक्री शुरू हो चुकी थी।
मोतिहारी में बंद पड़ी बारा चकिया चीनी मिल की जमीन बिक्री पर एक बार फिर रोक लगा दी गई है। यह फैसला तब आया है जब जमीन की बिक्री को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे। बताया जा रहा था कि जमीन बेचने का कोई स्पष्ट आदेश नहीं है, लेकिन बाद में बिक्री शुरू हो गई थी। अब आदेश में सुधार करते हुए पूर्वी चंपारण के जिलाधिकारी ने जमीन की बिक्री पर रोक लगा दी है। ‘अमर उजाला’ की मुहिम आखिरकार रंग लाई है।
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मुख्यमंत्री ने की थी मिल चालू करने की घोषणा
17 जनवरी को मोतिहारी में समृद्धि यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने खुले मंच से घोषणा की थी कि बंद पड़ी बारा चकिया चीनी मिल को फिर से चालू किया जाएगा। लेकिन बाद में यह सामने आया कि कोर्ट के आदेश के आधार पर मोतिहारी के डीएम सौरभ जोरवाल ने चीनी मिल की जमीन बेचने का आदेश दिया था। इस खबर को ‘अमर उजाला’ ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। साथ ही यह भी बताया गया था कि जिले के चार विधायकों ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर जमीन की बिक्री पर रोक लगाने की मांग की थी। खबर सामने आने के बाद पूर्वी चंपारण के जिला प्रशासन से लेकर पटना तक हलचल मच गई थी। अब एक बार फिर ‘अमर उजाला’ की मुहिम का असर दिखा है और जिलाधिकारी ने चकिया चीनी मिल की जमीन की बिक्री पर रोक लगा दी है।
पटना हाईकोर्ट में दायर एलपीए संख्या 1525/12 राज्य बनाम मेसर्स बैद्यनाथ शुगर मिल प्राइवेट लिमिटेड मामले में 9 जनवरी 2018 को आदेश पारित किया गया था। इस आदेश में 4 फरवरी 2012 को मोतिहारी के तत्कालीन डीएम न्यायालय और 12 जुलाई 2011 को मोतिहारी के एडीएम न्यायालय द्वारा दिए गए आदेशों को रद्द कर दिया गया था।
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया था कि भू हदबंदी नियम 1961 की धारा 10 के तहत नए सिरे से भू-हदबंदी की प्रक्रिया शुरू की जाए। इसका जिक्र तत्कालीन जिलाधिकारी ने 25 मई 2018 की अपनी कार्यवाही में भी किया था। उसी दिन विष्णु कांत गुप्ता को नोटिस जारी किया गया था। इसके बाद वाद संख्या 1/2018 में मई 2025 में वर्तमान मोतिहारी डीएम सौरभ जोरवाल ने करीब 60 एकड़ जमीन को सीलिंग से मुक्त कर दिया। इसकी सूची बनाकर जिला निबंधन कार्यालय को भेजी गई, ताकि जमीन की बिक्री में कोई परेशानी न हो।
14 जनवरी से शुरू हुई थी जमीन की बिक्री
डीएम के आदेश के बाद 14 जनवरी से चकिया चीनी मिल की जमीन की बिक्री शुरू हो गई। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री को इसकी जानकारी नहीं थी और उन्होंने 17 जनवरी को मंच से मिल को चालू करने की घोषणा कर दी। इसके बाद ‘अमर उजाला’ ने लगातार इस मुद्दे को उठाया। अब जिलाधिकारी ने एक बार फिर जमीन की बिक्री पर रोक लगा दी है। इस फैसले के बाद पूरे मामले में नया मोड़ आ गया है और लोगों की नजरें आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।