अधिकारी बनने वाले शिक्षक और स्टूडेंट्स
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अगर मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो और दृढ़ संकल्प होकर लक्ष्य के लिए लग जाएं तो सफलता आपके कदम चूमने लगेगी। मुजफ्फरपुर जिले में कटरा प्रखंड के एक छोटे से गांव में रहने वाले मनोज ने यह बड़ा कारनामा कर दिखाया है। इनकी सफलता पर परिवार ही नहीं, बल्कि इनके छात्र-छात्राएं भी खुश हैं और मिठाई खिलाकर अपने गुरु को शुभकामनाएं दे रहे हैं।
बिहार में बीपीएससी की 69वीं परीक्षा में मनोज ने अपनी तैयारी के लिए स्ट्रेटजी और ईमानदारी के साथ पढ़ाई और अनुशासन को सफलता का कारण बताया है। दिल्ली, मुंबई और महानगरी रंग-बिरंगे चकाचौंध करने वाली पढ़ाई के बीच छोटे से शहर में रहकर पहले खुद पढ़ाई की और दूसरे को पढ़ाई की तैयारी को करवाने के प्रण ने इस मुकाम को दिलवाया है। इसको लेकर मनोज कुमार खुद के साथ अपने माता-पिता को क्रेडिट देते हैं और अब लगातार प्रयास ने उनको आज रेवेन्यू अधिकारी बना दिया और उन्हें इस परीक्षा में 111वीं रैंक मिली है।
महानगरों की महंगी पढ़ाई नहीं है आवश्यक, अपनी दृढ़ निश्चय से पूरा होता है लक्ष्य
मनोज कुमार बताते हैं कि इस महानगर की पढ़ाई न सिर्फ महंगी है। बल्कि रहना, खाना-पीना आदि महंगा है। जो कि बिहार जैसे गरीब परिवार के छात्र-छात्राओं के लिए बेहद ही चुनौती से भरा हुआ रहता है। ऐसे में अगर अपने क्षेत्र को भी पढ़ने और पढ़ाने के लायक माहौल बना दिया जाय तो सफलता निश्चित ही मिलेगी। महज कुछ महीने पहले ही कोचिंग खोल कर पहले आर्थिक तंगी को खत्म किया था। फिर दारोगा बनाने के लक्ष्य के साथ बीपीएससी की तैयारी करने वाले छात्र-छात्राओं को पढ़ाना शुरू किया। कुछ ही महीने में इसका परिणाम आना शुरू हो गया। इस दौरान माता-पिता ने कहा, अब तुम्हें भी अपने लक्ष्य पर काम करना चाहिए तो सफलता निश्चित ही मिलेगी।