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धराली का जख्म: चंपारण के 14 मजदूर अब भी लापता, पुतला बनाकर किया कइयों का अंतिम संस्कार; मलबा देख कांपी रूह

Mon, 11 Aug 2025 01:39 PM IST
तरुणेंद्र चतुर्वेदी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरपुर

सार

Champaran Missing Workers: धराली की तबाही ने देशभर को हिलाकर रख दिया है। इस प्राकृतिक आपदा ने कई तरह के सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं, मजदूरी करने गए बिहार के चंपारण जिले के 14 मजदूर अभी-भी लापता हैं। परिजन धराली में उनकी तलाश में दर-दर भटक रहे हैं. अब तो कइयों का पुतला बनाकर अंतिम संस्कार किया गया है। 
 
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धराली गए चंपारण के 14 मजदूर अब भी लापता, कईयों का पुतला बनाकर किया अंतिम संस्कार। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Bihar migrant workers tragedy : उत्तराखंड के धराली में बीते सप्ताह बादल फटने से हुई तबाही ने पश्चिम चंपारण के कई गांवों को गहरे शोक में धकेल दिया है। सिकटा प्रखंड के मंगलहिया और छपैनिया गांव के 8 और चनपटिया प्रखंड के मोहछी गांव के तीन मजदूर अब तक लापता हैं। हादसे के बाद से परिजन लगातार फोन और पहचान वालों के जरिये संपर्क की कोशिश करते रहे हैं, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। उम्मीद के सहारे कुछ परिजन खुद धराली पहुंचे। वहां का मंजर देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। चारों ओर मलबा, टूटी सड़कें, बर्बाद घर… और हवा में फैली मौत की गंध। वे मायूस होकर लौटे तो गांव में चीख-पुकार मच गई।

धराली का खतरनाक मंजर देख कांप उठे

धराली से लौटे मंगलहिया के अनिरुद्ध ठाकुर, रिपोट दास और लालबाबू यादव ने बताया कि हादसे की जगह तक पहुंचना बेहद कठिन है। पहाड़ी रास्ते टूट चुके हैं, मलबे के बीच से गुजरना जान जोखिम में डालने जैसा है। रेस्क्यू टीम को भी वहां तक पहुंचने में कम से कम 10-15 दिन लग सकते हैं। उन्होंने साफ कहा, "जो हालात देखे, उसमें बचने की कोई संभावना नहीं है।”निराशा में डूबे अनिरुद्ध ठाकुर ने अपने भाई राकेश ठाकुर और रिपोट दास ने अपने 19 वर्षीय बेटे गुड्डू दास का कुश का पुतला बनाकर सिकरहना नदी किनारे रविवार को दाह संस्कार कर दिया। मैनाटांड़ के पुरुषोत्तमपुर गांव में भी शनिवार को देवराज शर्मा और उनके दो बेटों अनिल कुमार व सुशील शर्मा का प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार किया गया"

दर्दनाक: 'भाई सैलून में था, 10-12 लोग बैठे थे, सब बह गए'

अनिरुद्ध ठाकुर ने रोते हुए कहा, 'मेरा भाई धराली में सैलून चलाता था। हादसे के समय दुकान में 10-12 लोग बैठे थे। अचानक बादल फटा, तेज बहाव और मलबे ने सब कुछ निगल लिया। उसी पल सब बह गए या दब गए। घटना से ठीक पहले बात हुई थी, लेकिन फिर फोन हमेशा के लिए खामोश हो गया।' मैनाटांड़ के सुनील शर्मा ने बताया कि उनके पिता और दोनों भाई उत्तराखंड में 11 मजदूरों के साथ एक घर में रह रहे थे। हादसे वाले दिन उनके मामा श्याम शर्मा और ममेरा भाई आनंद कुमार बाहर काम से गए थे। बाकी नौ लोग घर के अंदर थे। उनमें से किसी का कोई पता नहीं चल पाया।
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लापता मजदूरों में सिकटा प्रखंड के मंगलहिया गांव के परशुराम ठाकुर के पुत्र राकेश कुमार (22), रिपोर्ट दास के पुत्र गुड्डू कुमार (18), स्व. रामेश्वर यादव के पुत्र बृजेश यादव (30), हरिलाल मुखिया के पुत्र संदीप कुमार (18), इन्द्रजीत साह के पुत्र संदीप कुमार (18) का पुतला बनाकर परिजनों ने अंतिम संस्कार कर दिया है।इनके अलावा मंगलहिया के छोटेलाल मुखिया के पुत्र रमाकांत कुमार (18) व हरिओम कुमार भी लापता हैं।

बैरिया प्रखंड के वृता टोला निवासी चंद्रदेव मुखिया के पुत्र रंजन कुमार (18) तथा चनपटिया प्रखंड के सुगर महछी वार्ड नं. 10 निवासी रुदल राम के पुत्र कृष्णा राम (22), दक्षिणी घोघा पंचायत के वार्ड नं. 4 निवासी किशुन कुशवाहा के पुत्र रामाधार कुशवाहा (31) तथा उत्तरी घोघा के घोघा घाट निवासी स्व. चंचल शर्मा के पुत्र निशु शर्मा (48) सहित 14 लोग घटना के बाद से लापता हैं। 

परिजनों में काफी बेचैनी

लापता लोगों के परिजन खोजबीन के लिए धराली गए हैं। अब तक सफलता नहीं मिली है। इसके कारण परिजनों में काफी बेचैनी है। स्थानीय प्रशासन व पुलिस से वे लोग संपर्क कर रहे हैं। इधर पुरुषोत्तमपुर थाना क्षेत्र के पुरुषोत्तमपुर गांव निवासी देवराज शर्मा (50) और उनके दो पुत्र अनिल कुमार (20) व सुशील कुमार 18 वर्षीय शामिल हैं। धराली हादसे ने पश्चिम चंपारण के इन गांवों में मातम पसार दिया है। घर-घर में बस इंतजार है… और मन में एक ही सवाल – क्या कभी लौटेंगे हमारे लोग?
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