नरकटियागंज रेलवे स्टेशन - फोटो : अमर उजाला
यह ट्रेन है तो पैसेंजर, लेकिन बिहार के सीमावर्ती पश्चिम चंपारण जिले से लेकर उत्तर प्रदेश के गोरखपुर तक की बड़ी आबादी को राहत देती रही है। भारी कोहरे के कारण दिसंबर माह से रद्द चल रही यह ट्रेन अब बहाल हो गई है, जिससे इस रेलखंड पर सफर करने वाले हजारों यात्रियों ने राहत की सांस ली है। नरकटियागंज और गोरखपुर कैंट रेलवे स्टेशन के बीच चलने वाली पैसेंजर ट्रेन (गाड़ी संख्या 55097/55098) का परिचालन एक बार फिर शुरू कर दिया गया है।
मरीजों और दैनिक यात्रियों को हो रही थी भारी परेशानी
दिसंबर में रेलवे द्वारा इस सवारी ट्रेन को अस्थायी रूप से रद्द किए जाने का सबसे अधिक प्रभाव गोरखपुर जाने वाले मरीजों, उनके परिजनों और छोटे स्टेशनों के यात्रियों पर पड़ा था। गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए गोरखपुर जाने वाले लोगों को मजबूरी में बस या निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ रहा था, जिससे उनके समय और आर्थिक बोझ दोनों में वृद्धि हुई थी।
भीड़ से मिलेगी निजात, सस्ता और सुलभ सफर बहाल
नरकटियागंज-गोरखपुर रेलखंड पर कुल चार जोड़ी पैसेंजर ट्रेनें संचालित होती हैं। एक जोड़ी ट्रेन के रद्द रहने से शेष ट्रेनों में यात्रियों का दबाव अत्यधिक बढ़ गया था। आलम यह था कि छोटे स्टेशनों से यात्रा शुरू करने वाले यात्रियों को लंबी दूरी की ट्रेनों में पैर रखने तक की जगह नहीं मिल रही थी और उन्हें खड़े होकर सफर करना पड़ रहा था। गोरखपुर इस क्षेत्र के लिए एक प्रमुख चिकित्सा और व्यावसायिक केंद्र है। ट्रेन के पुनः परिचालन से अब मरीजों और आम यात्रियों को एक बार फिर सस्ता, सुरक्षित और सुविधाजनक सफर मिल सकेगा।
नियमित परिचालन की मांग, यात्रियों ने बताया- जीवनरेखा
सवारी ट्रेन के दोबारा शुरू होने पर स्थानीय लोगों और नियमित यात्रियों ने संतोष व्यक्त किया है। साथ ही, उन्होंने रेलवे प्रशासन से मांग की है कि भविष्य में कोहरे जैसे कारणों का हवाला देकर पैसेंजर ट्रेनों को लंबे समय तक रद्द न किया जाए, क्योंकि ये ट्रेनें आम जनमानस की 'जीवनरेखा' हैं। यात्रियों का कहना है कि ग्रामीण इलाकों के आवागमन को सुगम बनाए रखने के लिए इन ट्रेनों की नियमितता अनिवार्य है।