पश्चिमी चंपारण के बगहा पुलिस जिला अंतर्गत अनुमंडलीय अस्पताल बगहा में अप्रैल से दिसंबर के बीच एचआईवी जांच के दौरान 36 नए संक्रमित मरीजों की पुष्टि हुई है। इन मरीजों में पुरुष, महिलाएं और बच्चे शामिल हैं, जिससे क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग की सतर्कता और निगरानी की अहमियत सामने आती है।
गर्भवती महिलाओं का सुरक्षित प्रसव
इन 36 एचआईवी संक्रमित मरीजों में तीन गर्भवती महिलाएं भी शामिल थीं, जिनका अस्पताल में सुरक्षित प्रसव कराया गया है। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार मां और नवजात की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सभी आवश्यक चिकित्सीय प्रोटोकॉल का पालन किया गया।
नियमित निगरानी और उपचार की व्यवस्था
अस्पताल प्रबंधन द्वारा सभी एचआईवी पॉजिटिव मरीजों की नियमित निगरानी की जा रही है और उनका उपचार सुनिश्चित किया जा रहा है। विभागीय निर्देशों के तहत संक्रमण की रोकथाम और नियंत्रण के लिए अस्पताल स्तर पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
जागरूकता अभियानों पर विशेष जोर
एचआईवी संक्रमण से बचाव के लिए अनुमंडलीय अस्पताल में निरंतर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। इन अभियानों के माध्यम से लोगों को सुरक्षित व्यवहार अपनाने, समय-समय पर जांच कराने और संक्रमण से बचाव के उपायों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य है कि लोग बिना झिझक जांच कराएं ताकि बीमारी का समय रहते पता चल सके।
संक्रमित मरीजों की स्थिति और सरकारी सहायता
अनुमंडलीय अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. ए.के. तिवारी ने बताया कि वर्तमान में दर्ज 36 एचआईवी संक्रमित मरीजों में आठ महिलाएं और तीन बच्चे शामिल हैं। सरकार की ओर से इन मरीजों को विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है।
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आर्थिक सहयोग और परवरिश योजना
बिहार जन शताब्दी योजना के तहत एचआईवी पॉजिटिव मरीजों को प्रतिमाह 1500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है, जिससे इलाज और दैनिक जरूरतों में मदद मिल सके। वहीं परवरिश योजना के अंतर्गत एचआईवी संक्रमित मरीजों के बच्चों को शून्य से 19 वर्ष की आयु तक प्रतिमाह एक हजार रुपये की सहायता प्रदान की जा रही है, ताकि उनकी शिक्षा, पोषण और पालन-पोषण सुनिश्चित हो सके।
नियमित शिविर और परामर्श व्यवस्था
परामर्शी रमेश रंजन ने बताया कि एचआईवी मरीजों और उनके आश्रितों को मिलने वाली सरकारी सहायता समय पर उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही हर छह माह में विशेष शिविर लगाकर मरीजों की स्वास्थ्य जांच की जाती है। उच्च जोखिम वाले लोगों की भी नियमित जांच और आवश्यक परामर्श दिया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार समय पर जांच, निरंतर इलाज और व्यापक जागरूकता अभियानों के जरिए एचआईवी संक्रमण पर प्रभावी नियंत्रण पाने का प्रयास लगातार जारी है।