Bihar : नगरपालिका और पंचायत चुनाव 2026 में पहली बार अत्याधुनिक मल्टी पोस्ट एस 3 मॉडल ईवीएम का इस्तेमाल किया जाएगा। पहले फेज में पांच जिलों को चुना गया है। इसको लेकर शुरुआती चरण में राज्य के 5 जिलों के अधिकारियों को ट्रेनिंग दी जा रही है।
बिहार में लोकतंत्र को अधिक आधुनिक और पारदर्शी बनाने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग एक ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है। जून-जुलाई में होने वाले नगरपालिका और पंचायत चुनाव 2026 में पहली बार अत्याधुनिक मल्टी पोस्ट एस 3 मॉडल ईवीएम का इस्तेमाल किया जाएगा। इस नई तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि मतदाता एक ही बार में अलग-अलग पदों के लिए आसानी से अपना वोट डाल सकेंगे। इस नई वोटिंग तकनीक को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग 25 मई से तीन दिनों का एक विशेष ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू करने जा रहा है।
क्या है तैयारी और कौन देगा ट्रेनिंग?
पहले फेज में पांच जिलों को चुना गया है। इसको लेकर शुरुआती चरण में राज्य के 5 जिलों के अधिकारियों को ट्रेनिंग दी जा रही है। इसमें राजधानी पटना, पूर्वी चम्पारण, औरंगाबाद, सारण और सिवान शामिल हैं। इन जिलों के नगर परिषदों और नगर पंचायतों के संभावित निर्वाची पदाधिकारी और जिला स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स इस ट्रेनिंग में हिस्सा लेंगे।
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कैसे काम करेगा ट्रेनिंग का पूरा नेटवर्क?
आयोग के सचिव मुकेश कुमार सिन्हा ने बताया कि इस तीन दिवसीय सत्र में तैयार होने वाले मास्टर ट्रेनर वापस अपने जिलों में जाएंगे। वहाँ वे दूसरे ट्रेनर्स और पोलिंग बूथ पर तैनात होने वाले मतदान कर्मियों को बारीकी से ट्रेनिंग देंगे। इसके साथ ही, विभाग ने सभी प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारियों को भी इस ट्रेनिंग में शामिल होना अनिवार्य कर दिया है, ताकि भविष्य में वे कुशल प्रशिक्षक की भूमिका निभा सकें।
नई ईवीएम की खासियत और आयोग का लक्ष्य
यह नई मल्टी पोस्ट एस 3 मॉडल ईवीएम अपनी शानदार सुरक्षा और तेजी से वोटों की गिनती करने की क्षमता के लिए जानी जाती है। संयुक्त निर्वाचन आयुक्त के अनुसार, आयोग ने इस नई तकनीक और ट्रेनिंग को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। सभी जिलाधिकारियों को समय पर अधिकारियों को भेजने का निर्देश दिया गया है। आयोग का लक्ष्य सिर्फ कर्मचारियों को सिखाना ही नहीं, बल्कि आम जनता को भी इस मशीन के प्रति जागरूक करना है ताकि आगामी चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और बिना किसी गड़बड़ी के संपन्न हो सकें।