बिहार सरकार ने लखीसराय के जिलाधिकारी मिथिलेश मिश्र को धान अधिप्राप्ति 2025-26 में कथित अनियमितताओं के आरोपों के बीच तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। उन्हें पटना में योगदान देने का निर्देश दिया गया है, जबकि एडीएम नीरज कुमार को अगले आदेश तक जिले का प्रभार सौंपा गया है।
क्या है पूरा मामला?
लखीसराय जिले को वर्ष 2025-26 के लिए 47,235 एमटी धान अधिप्राप्ति का लक्ष्य पहले से तय था। इसके अतिरिक्त 8,000 एमटी का लक्ष्य और आवंटित किया गया। आरोप है कि इसी अतिरिक्त लक्ष्य के वितरण में नियमों और विभागीय दिशा-निर्देशों की अनदेखी की गई। सहकारिता विभाग की जांच में सामने आया कि लक्ष्य का आवंटन न तो अनुपातिक था और न ही निष्पक्ष। कुछ समितियों को जरूरत से अधिक लक्ष्य दे दिया गया, जबकि कई समितियां पूरी तरह उपेक्षित रही।
मानकों को दरकिनार कर हुआ आवंटन
जांच रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि भंडारण क्षमता, पूर्व प्रदर्शन और कार्यक्षमता जैसे जरूरी मानकों का समान रूप से पालन नहीं किया गया। सरकार ने इसे निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता और वस्तुनिष्ठता की गंभीर कमी माना है।
डीएम का जवाब नहीं आया काम
जिलाधिकारी मिथिलेश मिश्र द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण की समीक्षा के बाद सरकार संतुष्ट नही हुई। अभिलेखीय तथ्यों से उनका पक्ष मेल नहीं खाता पाया गया, जिससे प्रथम दृष्टया प्रशासनिक लापरवाही और निष्पक्षता की कमी की पुष्टि हुई।
कदाचार मानते हुए शुरू हुई कार्रवाई
सरकार ने इस मामले को कर्तव्य में लापरवाही और पद के दुरुपयोग की श्रेणी में रखा है। अखिल भारतीय सेवाएं (आचरण) नियमावली, 1968 और (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1969 के तहत विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
तत्काल तबादला, एडीएम को प्रभार
सामान्य प्रशासन विभाग की अधिसूचना के मुताबिक, मिथिलेश मिश्र को तत्काल प्रभाव से स्थानांतरित करते हुए पटना बुलाया गया है। साथ ही अपर समाहर्ता-सह-अपर जिला दंडाधिकारी नीरज कुमार को अगले आदेश तक डीएम का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।
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प्रशासनिक गलियारों में हलचल
चानक हुई इस कार्रवाई से जिले में प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। धान अधिप्राप्ति जैसे संवेदनशील मामले में गड़बड़ी ने सरकार की कार्यप्रणाली और निगरानी तंत्र पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।