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Bihar News: कर्ज, खेत गिरवी और नंगे पांव की जिद से निकली जीत की राह, आज गूंज रहा पूरे देश में शैलेश का नाम

Sun, 28 Sep 2025 08:36 PM IST
तरुणेंद्र चतुर्वेदी न्यूज डेस्क, अमर उजाला,जमुई

सार

Jamui News : बिहार के जमुई जिले के अलीगंज प्रखंड के इस्लामनगर निवासी शैलेश कुमार का नाम आज पूरे देश भर में गूंज रहा है। लेकिन बचपन से ही दाहिने पैर से पोलियो प्रभावित शैलेश का सफर आसान नहीं था। पिता शिवनंदन यादव मामूली किसान हैं और मां प्रतिमा देवी गृहिणी। खेत की आमदनी से किसी तरह घर चलता है।
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Bihar News : शैलेश कुमार अपने परिवार के साथ एक समूह चित्र में। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जमुई जिले के अलीगंज प्रखंड के इस्लामनगर गांव का नाम आज शैलेश कुमार की वजह से देशभर में गूंज रहा है, पर इस गौरव के पीछे वर्षों का संघर्ष छिपा है। बचपन से ही दाहिने पैर से पोलियो प्रभावित शैलेश का सफर आसान नहीं था। पिता शिवनंदन यादव मामूली किसान हैं और मां प्रतिमा देवी गृहिणी। खेत की आमदनी से किसी तरह घर चलता है। ऐसे में बेटे की पढ़ाई और खेलों का खर्च उठाना परिवार के लिए चुनौती था। मां प्रतिमा देवी बताती हैं कि शैलेश को बचपन में इलाज के लिए पटना और नवादा तक ले जाया गया।

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डॉक्टरों ने ऑपरेशन की सलाह दी, पर डर और आर्थिक तंगी के कारण पिता ने मना कर दिया। महीनों तक एक्सरसाइज और इलाज चला, लेकिन पैर पहले जैसा न हो सका। परिजनों की चिंता थी कि आगे चलकर यह बच्चा कैसे खुद को संभालेगा। बावजूद इसके शैलेश ने अपनी शारीरिक कमी को कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया।

शैलेश के पास स्पोर्ट्स शू तक नहीं थे
खेल के शुरुआती दिनों में शैलेश के पास स्पोर्ट्स शू तक नहीं थे। गांव के खेतों में नंगे पांव दौड़ना ही उनकी ट्रेनिंग का हिस्सा बना। 2017 में जब उन्होंने जयपुर में नैशनल पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में नंगे पांव दौड़कर ब्रॉन्ज मेडल जीता, तो यह उनके संघर्ष का पहला बड़ा सबूत था। शैलेश की पढ़ाई के लिए पिता ने दो बीघा जमीन गिरवी रख दी और कर्ज लिया। नाना-नानी ने भी हर कदम पर आर्थिक मदद की। बड़े भाई कौशल कुमार, जो बिहार पुलिस में कार्यरत हैं, ने शैलेश के खेल करियर को आगे बढ़ाने में लगातार हौसला दिया।

विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में पदक जीतना बड़ी उपलब्धि

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2023 के पैरा एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल जीतकर शैलेश ने देश का नाम रोशन किया और परिवार की वर्षों की मेहनत सफल हुई। अब 2025 की विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में पदक जीतना उनके संघर्ष की सबसे बड़ी उपलब्धि है। शैलेश कहते हैं, “कभी सोचा नहीं था कि दिव्यांग होकर भी इतना आगे बढ़ूंगा। अगर परिवार का सहारा और खुद पर विश्वास न होता, तो शायद यह सफर यहीं खत्म हो जाता। शैलेश की यह यात्रा बताती है कि हौसला, परिश्रम और परिवार का समर्थन किसी भी कठिनाई को सफलता की कहानी में बदल सकता है।

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शैलेश की इस उपलब्धि पर गांव में हर्ष का माहौल
शैलेश की इस उपलब्धि से इस्लामनगर गांव से लेकर प्रखंड और जिला में हर्ष का माहौल है। पंचायत के मुखिया, सरपंच, समाजसेवी और ग्रामीणों ने उन्हें बधाई दी है। साथ ही उनके उज्जवल भविष्य की कामना भी की है।

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