राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत अपने चार दिवसीय प्रवास के तहत रविवार की शाम मुंगेर पहुंचे। सोमवार को प्रवास के दूसरे दिन उन्होंने सरस्वती विद्या मंदिर, पुरानीगंज में आयोजित कार्यकर्ता विकास वर्ग (प्रथम वर्ष) के विशेष प्रशिक्षण शिविर में भाग लिया। इस अवसर पर आयोजित बौद्धिक सत्र में उन्होंने देश के विभिन्न राज्यों से आए स्वयंसेवकों एवं कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन किया।
शताब्दी वर्ष को बताया नए संकल्पों का अवसर
अपने संबोधन में मोहन भागवत ने कहा कि संघ का शताब्दी वर्ष केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि नए संकल्पों के साथ राष्ट्र निर्माण के कार्य को और अधिक गति देने का वर्ष है। उन्होंने कहा कि संघ का लक्ष्य समाज को संगठित, जागरूक और राष्ट्रहित के लिए समर्पित बनाना है। “भारत माता की जय” का उद्घोष केवल नारा नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति समर्पण और कर्तव्यबोध का प्रतीक है।
व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण की बात
संघ प्रमुख ने कहा कि वर्ष 1925 में स्थापना के बाद से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने व्यक्ति निर्माण को राष्ट्र निर्माण का मूल आधार माना है। संघ की शाखा पद्धति केवल शारीरिक प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से अनुशासन, राष्ट्रभक्ति, सामाजिक समरसता और सेवा भाव का विकास किया जाता है। उन्होंने कहा कि पिछले 100 वर्षों से संघ इसी दिशा में सतत कार्य कर रहा है।
मुंगेर से पुराने संबंधों का किया उल्लेख
मोहन भागवत ने बिहार, विशेषकर मुंगेर से अपने पुराने संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 1995 में मुंगेर में संघ शिक्षा वर्ग द्वितीय वर्ष का आयोजन हुआ था, जिसे वर्तमान में कार्यकर्ता विकास वर्ग के नाम से जाना जाता है।
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संतों से मुलाकात और सुरक्षा के व्यापक इंतजाम
प्रवास के दौरान उन्होंने कुप्पाघाट स्थित महर्षि मेंहीं आश्रम में प्रख्यात संत स्वामी सत्यप्रकाश महाराज से भेंट की। साथ ही व्यवस्था में जुटे पुराने स्वयंसेवकों से मुलाकात कर पुरानी यादों को भी साझा किया। संघ प्रमुख के प्रवास को लेकर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं तथा स्वयंसेवक भी व्यवस्था संचालन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।