स्कूल में पानी भरने से बच्चों की पढ़ाई-लिखाई ठप
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मुंगेर जिले में गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे बाढ़ जैसे हालात बनते जा रहे हैं। बुधवार को गंगा का जलस्तर 39.13 मीटर दर्ज किया गया, जो चेतावनी स्तर को पार कर अब खतरे के निशान के बेहद करीब पहुंच चुका है। इस कारण न केवल खेत-खलिहान जलमग्न हो रहे हैं, बल्कि शैक्षणिक संस्थानों का भी संचालन बुरी तरह प्रभावित हो गया है।
विद्यालयों में घुसा पानी, शिक्षकों और छात्रों की आवाजाही ठप
गंगा के बढ़ते प्रभाव से मुंगेर शहरी क्षेत्र के हेरुदियारा स्थित मध्य विद्यालय सबसे अधिक प्रभावित हुआ है, जहां तीन से चार फीट तक बाढ़ का पानी विद्यालय परिसर में जमा हो गया है। पानी इस कदर भर गया है कि शिक्षक विद्यालय के अंदर प्रवेश करने से डर रहे हैं। नतीजन, विद्यालय में पठन-पाठन पूरी तरह से बाधित हो गया है।
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विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने बताया कि स्थिति की गंभीरता से जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (सर्व शिक्षा अभियान) और प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को सूचित कर दिया गया है। हालांकि शिक्षकों ने विद्यालय तक पहुंचने की कोशिश की, लेकिन परिसर में भरे पानी के कारण कक्षा कक्ष तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो गया है।
गांवों में भी हालात भयावह, घर-खेत डूबने लगे
सदर प्रखंड के कुतलूपुर, जफरनगर और तारापुर दियारा क्षेत्र के कई गांवों में गंगा का पानी घुस चुका है। निचले इलाकों में घर और खेत जलमग्न हो चुके हैं, जिससे ग्रामीणों के जीवन पर संकट गहराता जा रहा है। कई लोग सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं तो कुछ लोग उंचे स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हैं।
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प्रशासन की ओर से सीमित प्रतिक्रिया, राहत कार्य शुरू नहीं
हालांकि जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और शैक्षणिक संस्थान भी प्रभावित हो रहे हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस राहत कार्य प्रारंभ नहीं किया गया है। स्थानीय लोग सरकारी सहायता की उम्मीद लगाए बैठे हैं, जबकि कई इलाकों में बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह से ठप हो चुकी है।