Bihar News: मुंगेर के जिला स्कूल में शुरू किए गए सामुदायिक किचन में बाढ़ पीड़ितों को परोसे गए भोजन की गुणवत्ता पर ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। आरोप है कि चावल से बदबू आ रही थी और सब्जी बासी थी, जिसके बाद कुछ लोगों ने खाना खाने से इनकार कर दिया। प्रशासन ने मामले की जानकारी लेकर जांच की बात कही है।
बिहार में बाढ़ का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है। मुंगेर जिले में भी बाढ़ की स्थिति विकराल होती जा रही है। जिले के छह प्रखंडों की 38 पंचायतें बाढ़ से प्रभावित हैं। निचले इलाकों में पानी प्रवेश करने के बाद बड़ी संख्या में लोग घर छोड़कर सुरक्षित और ऊंचे स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं। बाढ़ प्रभावित लोगों को राहत देने के लिए जिला प्रशासन की ओर से सामुदायिक किचन शुरू किए गए हैं, लेकिन राहत व्यवस्था शुरू होने के साथ ही भोजन की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
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राहत के लिए पहुंचे लोगों ने खाना खाने से किया इनकार
ताजा मामला जिला स्कूल में शुरू किए गए सामुदायिक किचन का है। रविवार को यहां बाढ़ पीड़ितों को परोसे गए भोजन को लेकर ग्रामीणों ने नाराजगी जताई और खाना खाने से इनकार कर दिया। बबुआ घाट पहुंचे बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए शुरू किए गए इस सामुदायिक किचन में जाफरनगर पंचायत के सीताचरण गांव के ग्रामीणों ने भोजन की गुणवत्ता पर सवाल उठाए।
'चावल से बदबू, सब्जी भी बासी'
ग्रामीणों का आरोप है कि परोसे गए चावल से बदबू आ रही थी, जबकि सब्जी भी बासी थी। ग्रामीण नागों सिंह, विनोद कुमार और राधेश्याम ने बताया कि सुरेंद्र बाबू के पार्क से बाढ़ प्रभावित लोगों को सामुदायिक किचन तक लाया गया था। घर-बार छोड़कर राहत के लिए पहुंचे लोगों को उम्मीद थी कि कम से कम भोजन की व्यवस्था बेहतर होगी, लेकिन खाना परोसे जाने के बाद गुणवत्ता खराब होने की शिकायत सामने आई।
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‘बाढ़ ने पहले ही उजाड़ दिया, अब खाने में भी लापरवाही क्यों?’
ग्रामीणों ने कहा कि बाढ़ के कारण पहले ही उनका जनजीवन अस्त-व्यस्त है। ऐसे में यदि राहत के नाम पर मिलने वाले भोजन में भी लापरवाही होगी तो उनकी परेशानी और बढ़ जाएगी। उनका कहना है कि संकट की इस घड़ी में प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।
सामुदायिक किचन की निगरानी पर उठी उंगली
जिला स्कूल में सामुदायिक किचन शनिवार को शुरू हुआ था। इसके अगले ही दिन भोजन की गुणवत्ता को लेकर शिकायत सामने आने से प्रशासनिक निगरानी पर सवाल उठ रहे हैं। बाढ़ पीड़ितों को राहत देने के लिए शुरू की गई व्यवस्था में भोजन की गुणवत्ता सुनिश्चित करना अब प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती है। आपदा प्रभारी कमल किशोर ने कहा कि मामले की जानकारी ली जा रही है। जांच के बाद ही इस संबंध में कुछ कहा जा सकेगा।