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LS Polls: खगड़िया में आमने सामने की टक्कर; NDA और महागठबंधन की अग्नि परीक्षा, मतदाताओं का मूड साइलेंट

Tue, 30 Apr 2024 02:04 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, खगड़िया

सार

LS Polls: खगड़िया का राजनीतिक पारा काफी हाई हो चुका है। एनडीए और महागठबंधन की तरफ से मतदाताओं को अपने पाले में लाने की जोड़ आजमाइश की जा रही है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि दोनो गठबंधन के लिए खगड़िया चुनाव अग्नि परीक्षा के सामान है। 
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खगड़िया में आमने सामने की टक्कर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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लोकसभा चुनाव 2024 के तीसरे चरण का मतदान 7 मई को है। ऐसे में खगड़िया का राजनीतिक पारा काफी हाई हो चुका है। एनडीए और महागठबंधन की तरफ से मतदाताओं को अपने पाले में लाने की जोड़ आजमाइश की जा रही है, लेकिन मतदाता की चुप्पी ने इस लोकसभा चुनाव को काफी पेचीदा बना दिया है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि दोनो गठबंधन के लिए खगड़िया चुनाव अग्नि परीक्षा के सामान है। हालांकि आमने सामने की इस टक्कर में बाजी कौन मरेगा यह तो 4 जून को मतगणना के बाद ही मालूम पड़ेगा, बावजूद इसके यह भी सत्य है कि मतदाताओं का साइलेंट मूड में आना किसी न किसी एक गठबंधन के लिए खतरे की घंटी के सामान है। 

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ग्रामीण मतदाताओं का साइलेंट होना दोनों के लिए बना अबूझ पहेली
6 विधानसभा से मिलकर बने इस खगड़िया लोकसभा में शहरी क्षेत्र के मतदाता थोड़े बहुत खुलकर अपनी बात रख रहे हैं। कोई मोदी के काम को देख अपनी प्रतिक्रिया दे रहा है तो कोई इसे छलावा बताकर महागठबंधन को सपोर्ट कर रहा है, लेकिन सुदूर ग्रामीण इलाकों की सच्चाई इससे काफी इतर है। 2019 के चुनाव में जहां लोग खुलकर अपनी बात बोला करते थे, वहीं 2024 में ये लोग साइलेंट हैं। जो अभी तक एनडीए और महागठबंधन के लिए अबूझ पहेली ही है।

रैलियों में उमड़ रही भीड़ दोनो खेमे को दे रहा ऑक्सीजन
हालांकि चुनावी रैलियां की अगर बात की जाए तो खगड़िया में एनडीए और महागठबंधन दोनों की रैलियां में अच्छी खासी भीड़ जुट रही है। जो दोनों खेमों को अभी तक ऑक्सीजन दे रहा है। खगड़िया में एक तरफ जहां महागठबंधन बाहरी प्रत्याशी के मुद्दे को ढाल बनाकर मतदाता के बीच पहुंच बनाने की जुगत में है, वहीं एनडीए मोदी का चेहरा आगे कर ज्यादा से ज्यादा मत पाने की चाह से मैदान में डटकर मुकाबला कर रहा है। बहरहाल जोर आजमाइश की इस खेल में किसके सर शेहरा बंधेगा यह तो समय के गर्भ में है। लेकिन मतदाताओं ने अपनी चुप्पी से दोनों खेमो की चिंताएं बढ़ा जरूर रखा है।

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