लखीसराय जिले के अरमा गांव के महादलित मोहल्लों में एक बार फिर मानसून का पानी कहर बनकर टूटा है। हर साल की तरह इस बार भी बारिश ने गांववासियों के जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। लगातार हो रही बारिश से गांव की गलियों और घरों में पानी भर गया है। हालात ऐसे हैं कि कई परिवारों को घर छोड़ छत पर रात गुजारनी पड़ रही है। बारिश के बाद जलनिकासी की कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण गंदा पानी पूरे मोहल्ले में फैल गया है।
गंदे पानी से पनपीं स्वास्थ्य समस्याएं
जानकारी के मुताबिक, गांव में जलजमाव के कारण अब स्वास्थ्य संकट भी गहराता जा रहा है। गंदे पानी से होकर गुजरने के कारण लोगों के पैरों में घाव हो रहे हैं और जल पीने से बीमारियों का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है। गांव के बच्चे जलमग्न रास्तों से स्कूल पहुंचते हैं, जहां सांप-बिच्छू के काटने का डर हमेशा बना रहता है। इतना ही नहीं, अरमा का सामुदायिक केंद्र भी पानी से घिर चुका है, बावजूद इसके बच्चों को वहीं पढ़ाई करनी पड़ रही है।
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प्रशासन के आश्वासन अधूरे, समस्याएं जस की तस
ग्रामीणों ने बताया कि वर्षों से वे जलजमाव की इस समस्या से जूझ रहे हैं। कई बार अधिकारियों को ज्ञापन दिए गए, पिछली बार जिलाधिकारी ने खुद गांव का दौरा भी किया था, लेकिन कोई स्थायी समाधान अब तक नहीं हो पाया है। हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान सांसद राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने भी समाधान का भरोसा दिलाया था, लेकिन वह भी सिर्फ चुनावी वादा बनकर रह गया।
अधूरा नाला निर्माण और सफाई की अनदेखी बनी बड़ी वजह
गांव में जलजमाव की एक बड़ी वजह अधूरा पड़ा नाला निर्माण और उसकी नियमित सफाई नहीं होना है। ग्रामीणों का कहना है कि नाले की सफाई समय पर नहीं होती, जिससे पानी निकलने का रास्ता बंद हो जाता है। कुछ स्थानीय लोग राजनीतिक कारणों से समाधान में बाधा डालते हैं, जिससे स्थिति और बिगड़ जाती है।
राजनीतिक उपेक्षा और प्रशासनिक लापरवाही का नमूना बना गांव
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि चूंकि वे महादलित समुदाय से आते हैं, इसलिए उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया जाता। न तो पंचायत स्तर पर उनकी सुनवाई होती है, न ही जिले के बड़े अधिकारी कोई ठोस पहल करते हैं। अरमा गांव का यह जलजमाव अब केवल एक मौसमी परेशानी नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीतिक उपेक्षा और प्रशासनिक लापरवाही का प्रतीक बन चुका है।
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अब ठोस कार्रवाई की मांग
गांववासियों की मांग है कि इस बार सिर्फ घोषणाएं नहीं, बल्कि ठोस और जमीनी कार्रवाई हो। नाला निर्माण जल्द पूरा कराया जाए और उसकी समय-समय पर सफाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही जलनिकासी के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए ताकि भविष्य में ऐसी आपदा से बचा जा सके। ग्रामीणों का कहना है कि अब अगर समाधान नहीं हुआ, तो आगामी चुनावों में वे अपनी नाराजगी जाहिर करेंगे।