समृद्धि यात्रा के क्रम में कजरा पहुंचे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लखीसराय जिले के विकास को गति देने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण योजनाओं की घोषणा की। उन्होंने 208 करोड़ रुपये की लागत से 144 योजनाओं का शिलान्यास और 118 करोड़ रुपये की 117 योजनाओं का उद्घाटन किया। इस दौरान विभिन्न विभागों की योजनाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को कार्यों को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि इन परियोजनाओं से जिले में स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं में सुधार होगा। उन्होंने इसे जिले के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि राज्य सरकार आम लोगों तक विकास का लाभ पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।
विपक्ष पर हमला, 'जंगलराज' का जिक्र
सभा के दौरान मुख्यमंत्री ने पिछली सरकार के शासनकाल पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पूर्व में राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति बेहद खराब थी और लोग असुरक्षा के माहौल में जीने को मजबूर थे। उनके अनुसार, वर्तमान सरकार ने राज्य में सुरक्षा और विकास का नया माहौल स्थापित किया है। इस मौके पर उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने भी पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए वर्तमान शासन में सड़क, बिजली और बुनियादी ढांचे में हुए सुधारों को रेखांकित किया।
स्थानीय उम्मीदों को झटका
जहां एक ओर सरकारी स्तर पर योजनाओं की घोषणा हुई, वहीं स्थानीय लोगों की बड़ी उम्मीदें अधूरी रह गईं। कजरा में मेडिकल कॉलेज की स्थापना, जलवा पहाड़ी में खनन कार्य शुरू करने, क्षेत्र को पर्यटन हब के रूप में विकसित करने और कजरा को प्रखंड का दर्जा देने जैसी प्रमुख मांगों पर कोई ठोस घोषणा नहीं हो सकी। श्रृंगी ऋषि धाम, जलप्पा स्थान और टाली को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने तथा उरैन को बौद्ध सर्किट से जोड़ने की मांग भी पूरी नहीं हुई। इसके अलावा, शिक्षा के क्षेत्र में एकलव्य विद्यालय, नेताजी सुभाष चन्द्र बोस छात्रावास और डिग्री कॉलेज की स्थापना की उम्मीद भी अधूरी रही, जिससे युवाओं में निराशा देखी गई। रेलवे सुविधाओं को लेकर भी लोगों को झटका लगा। कोरोना काल में बंद हुई ट्रेनों के कजरा स्टेशन पर ठहराव की बहाली को लेकर कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की गई।
व्यवस्थाओं पर उठे सवाल
कार्यक्रम के दौरान व्यवस्थाओं की कमी भी साफ तौर पर सामने आई। तेज धूप और उड़ती धूल के बीच लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। सभा स्थल तक पहुंचने वाली सड़कों पर धूल नियंत्रण के लिए पर्याप्त पानी का छिड़काव नहीं किया गया, जिससे लोगों को सांस लेने में दिक्कत और आंखों में जलन की शिकायत हुई। सभा स्थल पर छाया की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। छोटा पंडाल होने के कारण बड़ी संख्या में लोग खुले में बैठने को मजबूर हुए। खासकर बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को कड़ी धूप में घंटों इंतजार करना पड़ा।
पेयजल के लिए जद्दोजहद
भीषण गर्मी के बीच पेयजल की कमी भी लोगों के लिए बड़ी समस्या बनी रही। कार्यक्रम स्थल पर लगाए गए जल वाहन के पास भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जहां पानी के लिए लोगों को धक्का-मुक्की करनी पड़ी। कई लोग बिना पानी लिए ही लौटने को मजबूर हुए।
रील्स बनाने की होड़ से बढ़ी अव्यवस्था
कार्यक्रम के दौरान युवाओं में रील्स और वीडियो बनाने की होड़ भी अव्यवस्था का कारण बनी। बेहतर दृश्य कैद करने के प्रयास में कई लोग बैरिकेडिंग और कुर्सियों पर चढ़ गए, जिससे अफरातफरी जैसी स्थिति बन गई। इस दौरान प्रशासन की सक्रियता पर भी सवाल उठे।
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शिक्षा मंत्री को नहीं मिला बोलने का मौका
सभा में एक और मुद्दा चर्चा का विषय बना, जब मंच पर मौजूद शिक्षा मंत्री को संबोधन का अवसर नहीं मिला। इसे लेकर राजनीतिक और स्थानीय स्तर पर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। हालांकि इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।