जमुई सदर अस्पताल में 12 घंटे के भीतर दो प्रसूता महिलाओं की मौत के बाद परिजनों ने शव रखकर प्रदर्शन किया। मंत्री श्रेयसी सिंह ने इलाज व्यवस्था पर सवाल उठाए। जिला प्रशासन ने जांच समिति गठित कर 24 घंटे में रिपोर्ट मांगी।
जमुई सदर अस्पताल में 12 घंटे के भीतर दो प्रसूता महिलाओं की मौत के बाद रविवार को जमकर हंगामा हुआ। आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल के मुख्य द्वार पर शव रखकर प्रदर्शन किया और जिम्मेदार चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। परिजनों ने चिकित्सकीय लापरवाही और ड्यूटी से महिला चिकित्सकों के गायब रहने का आरोप लगाया। हंगामे की सूचना पर बिहार सरकार की खेल एवं उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह भी अस्पताल पहुंचीं। उन्होंने इलाज व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए दोषी चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही।
पहला मामला खैरा थाना क्षेत्र के नरियाना गांव की 28 वर्षीय अनिता कुमारी का है। उनके पति सुजीत कुमार के अनुसार, शनिवार रात प्रसव पीड़ा होने पर अनिता को पहले खैरा स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। वहां से उन्हें जमुई सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया। रात करीब 11 बजे अस्पताल पहुंचने के बाद परिजनों का आरोप है कि प्रसव कक्ष में महिला चिकित्सक मौजूद नहीं थीं। जांच के बाद चिकित्सक के आने की बात कही गई, लेकिन रातभर अनिता की हालत बिगड़ती रही। रविवार सुबह करीब पांच बजे उनकी मौत हो गई। परिजनों के अनुसार, अनिता का यह तीसरा प्रसव था।
दूसरा मामला चौहानडीह गांव की 26 वर्षीय आस्था कुमारी का है। परिजनों के अनुसार, शनिवार को सदर अस्पताल में ऑपरेशन से उनका प्रसव कराया गया था। उन्होंने एक बेटे को जन्म दिया। ऑपरेशन के बाद उनकी हालत सामान्य थी, लेकिन रात करीब 12 बजे अचानक तबीयत बिगड़ गई। परिजनों का आरोप है कि उस समय महिला चिकित्सक ड्यूटी रूम में मौजूद नहीं थीं। इमरजेंसी में तैनात चिकित्सक के इलाज के बाद कुछ देर के लिए उनकी हालत में सुधार हुआ, लेकिन रविवार सुबह फिर तबीयत बिगड़ गई। करीब 10 बजे उनकी मौत हो गई।
मंत्री ने पूछा कि मरीज की स्थिति गंभीर होने के बावजूद उसे गंभीरता से क्यों नहीं लिया गया और महिला चिकित्सक को क्यों नहीं बुलाया गया। उन्होंने कहा कि मरीज और उनके परिजन डॉक्टरों पर भरोसा करते हैं। ऐसे में किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। मंत्री ने कहा कि 12 घंटे के भीतर दो महिलाओं की मौत गंभीर मामला है। इसकी जानकारी मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार को भी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि मामले में दोषी पाए जाने वाले चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
वहीं, अंचलाधिकारी सौरभ कुमार भी अस्पताल पहुंचे और पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने परिजनों से लिखित आवेदन देने को कहा। प्रशासन की ओर से पूरे मामले की जानकारी वरीय अधिकारियों को दी गई है। साथ ही दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है।
उप विकास आयुक्त की अध्यक्षता में गठित इस समिति में सिविल सर्जन और वरीय उप समाहर्ता सावन कुमार को सदस्य बनाया गया है। जिला पदाधिकारी ने जांच समिति को प्राथमिकता के आधार पर पूरे मामले की तथ्यात्मक जांच कर 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।