आरक्षण में उपवर्गीकरण और दलित समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर जमुई की सियासत मंगलवार को गरमा गई। हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के सिकंदरा विधायक प्रफुल्ल मांझी ने मंगलवार को जमुई सर्किट हाउस में केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और जमुई सांसद अरुण भारती पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पासवान परिवार ने आरक्षण और राजनीतिक प्रभाव का लाभ मुख्य रूप से अपने परिवार तक सीमित रखा।
विधायक ने कहा कि आरक्षण की समीक्षा संवैधानिक व्यवस्था के तहत संभव है और राज्य सरकार से अनुसूचित जाति के भीतर उपवर्गीकरण की मांग की जाएगी। उनका कहना था कि इससे उन जातियों को लाभ मिल सकेगा, जो अब तक आरक्षण का अपेक्षित लाभ नहीं उठा पाई हैं और सामाजिक रूप से पिछड़ी हुई हैं।
प्रफुल्ल मांझी ने टोला सेवकों के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि जीतन राम मांझी के प्रयास से भुइयां समाज के लोगों को टोला सेवक के रूप में अवसर मिला था, लेकिन हाई कोर्ट से जुड़े मामले के कारण कई टोला सेवकों का वेतन प्रभावित हुआ है। विधायक ने आरोप लगाया कि कई कर्मियों को करीब छह महीने से वेतन नहीं मिला है।
उन्होंने रामविलास पासवान को दलित समाज का बड़ा नेता बताते हुए उनके राजनीतिक सफर पर भी सवाल उठाए। विधायक ने कहा कि जीतन राम मांझी को जब भी मौका मिला, उन्होंने समाज के लोगों के लिए काम किया। उन्होंने विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण का जिक्र करते हुए कहा कि मांझी के हिस्से आई छह सीटों में चार टिकट भुइयां समाज और दो सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को दिए गए।
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प्रफुल्ल मांझी ने इसके बाद पासवान परिवार की पारिवारिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि को लेकर व्यक्तिगत सवाल उठाए। उन्होंने अरुण भारती से उनके पिता के नाम और उनकी सास के नाम व समुदाय की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने कहा कि जमुई के सांसद होने के नाते जनता को उनके पारिवारिक परिचय की जानकारी होनी चाहिए।
विधायक ने कहा कि जीतन राम मांझी ने अपने परिवार और राजनीतिक जीवन से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक रखी है। उनके इस बयान के बाद जमुई की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज होने के आसार हैं।