बेगूसराय में गंगा का बढ़ता जलस्तर सिर्फ घरों और खेतों को ही नहीं डुबो रहा, बल्कि अब बच्चों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था की परीक्षा भी लेने लगा है। जिले के आठ प्रखंडों के 169 प्राथमिक एवं मध्य विद्यालय बाढ़ की चपेट में हैं। इनमें 147 विद्यालय सीधे बाढ़ के पानी से प्रभावित हैं, जबकि 22 विद्यालयों में बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत शिविर और सामुदायिक रसोई संचालित हो रही हैं। इसका सीधा असर 40 हजार से अधिक विद्यार्थियों की अर्धवार्षिक परीक्षा पर पड़ा है। मंगलवार से कक्षा एक से आठ तक के विद्यार्थियों की अर्धवार्षिक मूल्यांकन परीक्षा शुरू होनी थी। लेकिन जिन स्कूलों में पानी भरा है या जहां तक पहुंचने का रास्ता ही बंद है, वहां बच्चों को परीक्षा दिलाना उनकी सुरक्षा के साथ खिलवाड़ साबित हो सकता है। लिहाजा प्रभावित विद्यालयों में परीक्षा फिलहाल स्थगित कर दी गई है।
एक तरफ बाढ़, दूसरी तरफ बच्चों का भविष्य
बाढ़ प्रभावित इलाकों में करीब 15 दिनों से विद्यालयों में पढ़ाई बाधित है। बच्चे घरों में रहकर परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। अभिभावकों को उम्मीद थी कि हालात कुछ सामान्य होंगे और बच्चे परीक्षा देकर अपनी पढ़ाई को आगे बढ़ाएंगे। लेकिन गंगा के उफान ने उनकी उम्मीदों पर भी पानी फेर दिया। सबसे बड़ी चिंता यह है कि कई बच्चों के लिए स्कूल सिर्फ पढ़ाई की जगह नहीं, बल्कि सामान्य जीवन का केंद्र है। लगातार स्कूल बंद रहने से पढ़ाई का नुकसान पहले ही हो चुका है। अब परीक्षा टलने से विद्यार्थियों को नए कार्यक्रम का इंतजार करना पड़ेगा।
बछवाड़ा में सबसे ज्यादा 45 स्कूल प्रभावित
आठ प्रखंडों में बाढ़ का असर अलग-अलग स्तर पर है। बछवाड़ा में 45, मटिहानी में 30, बलिया में 27 और शाम्हो में 19 विद्यालय प्रभावित हैं। इसके अलावा तेघड़ा के 11, साहेबपुर कमाल के सात, बेगूसराय सदर के छह और बरौनी के दो विद्यालयों में पानी या आवागमन की समस्या के कारण परीक्षा कराना संभव नहीं है। कई स्कूलों तक पहुंचने वाले रास्ते भी जलमग्न हैं। ऐसे में छोटे बच्चों को नाव या बाढ़ के पानी से होकर परीक्षा केंद्र तक पहुंचाना गंभीर जोखिम बन सकता है।
जहां किताबें होनी थीं, वहां चल रही सामुदायिक रसोई
बाढ़ की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 22 विद्यालयों में बच्चों की परीक्षा के बजाय बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत शिविर चल रहे हैं। स्कूल भवनों में परिवार शरण लिए हुए हैं और वहीं सामुदायिक रसोई के माध्यम से भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। यह तस्वीर बाढ़ की दोहरी मार दिखाती है-एक ही विद्यालय कहीं बच्चों के भविष्य की नींव है तो कहीं आज बाढ़ पीड़ितों के लिए जीवन बचाने का सहारा।
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15 सितंबर से होना था मूल्यांकन
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार परीक्षा 15 सितंबर से शुरू होनी थी। भाषा, विज्ञान, अंग्रेजी, सामाजिक विज्ञान, गणित सहित विभिन्न विषयों की परीक्षाएं अलग-अलग पालियों में निर्धारित थीं। लेकिन बाढ़ प्रभावित विद्यालयों के बच्चों के लिए यह परीक्षा अब नए कार्यक्रम के तहत होगी। शिक्षा विभाग का कहना है कि परीक्षा रद्द नहीं की गई है, बल्कि स्थगित की गई है। पानी घटने और विद्यालयों तक आवागमन सामान्य होने के बाद इन विद्यार्थियों के लिए विशेष परीक्षा आयोजित की जाएगी।
शिक्षा विभाग ने भेजी रिपोर्ट
जिला शिक्षा पदाधिकारी मनोज कुमार के अनुसार बाढ़ प्रभावित विद्यालयों की पूरी रिपोर्ट बिहार शिक्षा परियोजना परिषद के निदेशक को भेज दी गई है। जिन विद्यालयों में परीक्षा संचालन की स्थिति सामान्य है, वहां निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार परीक्षा होगी। वहीं, बाढ़ प्रभावित विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए बाद में विशेष परीक्षा कराई जाएगी।
सबसे बड़ा सवाल- बाढ़ के बाद पढ़ाई की भरपाई कैसे होगी?
बाढ़ उतर जाएगी। पानी सूख जाएगा। राहत शिविर भी धीरे-धीरे हट जाएंगे। लेकिन बच्चों की पढ़ाई में जो खालीपन पैदा हो रहा है, उसकी भरपाई कैसे होगी- यह सवाल अब शिक्षा विभाग के सामने है। 40 हजार से अधिक बच्चे सिर्फ एक परीक्षा से नहीं, बल्कि लगातार बाधित हो रही पढ़ाई से प्रभावित हो रहे हैं। छोटे बच्चों के लिए लंबे समय तक स्कूल से दूर रहना सीखने की प्रक्रिया पर भी असर डाल सकता है। जरूरत सिर्फ विशेष परीक्षा कराने की नहीं है। बाढ़ का पानी उतरने के बाद विद्यालयों की सफाई, सुरक्षित पेयजल, शौचालय, आवागमन और पढ़ाई की गति को सामान्य करना भी बड़ी चुनौती होगी।
बाढ़ सिर्फ घर नहीं डुबोती, सपनों को भी डुबो सकती है
बेगूसराय में बाढ़ की यह तस्वीर प्रशासन के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर रही है—राहत और बचाव के साथ क्या बच्चों की शिक्षा को भी आपदा प्रबंधन की प्राथमिकता बनाया जा रहा है? आज 169 विद्यालय बाढ़ से घिरे हैं और 40 हजार से अधिक बच्चे परीक्षा से दूर हैं। कल पानी उतर जाएगा, लेकिन इन बच्चों के भविष्य पर पड़ा असर कितनी जल्दी दूर होगा, इसका जवाब विशेष परीक्षा की तारीख से ज्यादा शिक्षा की भरपाई के ठोस इंतजाम में छिपा है।