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Bihar: पोल पहले से टेढ़ा, जमीन भी कमजोर... फिर भी हजारों की भीड़, अशोक धाम हादसे में 7 मौतों का जिम्मेदार कौन?

Tue, 18 Aug 2026 11:42 AM IST
आशुतोष प्रताप सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखीसराय

सार

अशोक धाम हादसे के 24 घंटे बाद भी भगदड़ की पूरी वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है। जांच में सामने आया है कि हादसे वाले बिजली पोल के आसपास करीब 20 दिन पहले दो से तीन फीट मिट्टी काटी गई थी, जिससे जमीन कमजोर होने की बात कही जा रही है।
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अशोक धाम हादसा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अशोक धाम हादसे के 24 घंटे बाद भी भगदड़ की पूरी कड़ी साफ नहीं हो सकी है। जिस बिजली के पोल के गिरने के बाद करंट फैलने की अफवाह ने श्रद्धालुओं में दहशत पैदा की, उसके आसपास करीब 20 दिन पहले मिट्टी काटे जाने और पोल के कमजोर होने की जानकारी सामने आई है। बिजली विभाग के जेई नवीन केवट ने भी पोल के टेढ़े होने की जानकारी होने की बात कही है। इसके बावजूद सावन की तीसरी सोमवारी पर हजारों श्रद्धालुओं की आवाजाही उसी रास्ते से होती रही। इसी बीच दो ट्रेनों के पहुंचने से भीड़ का दबाव बढ़ा, बैरिकेडिंग टूट गई और पोल गिरने के बाद फैली अफवाह ने स्थिति को और भयावह बना दिया। भगदड़ में सात महिला श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि 25 लोग घायल हुए। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब खतरा पहले से मौजूद था, तो उसे हादसे में बदलने से पहले टाला क्यों नहीं गया?

20 दिन पहले काटी गई थी पोल के आसपास की मिट्टी

घटनास्थल अशोक धाम स्टेशन के पास प्रवेश द्वार पर खेत की जमीन से करीब दो से तीन फीट मिट्टी काटे जाने की बात सामने आई है। बताया जा रहा है कि यह काम हादसे से करीब 20 दिन पहले किया गया था। इससे बिजली के पोल के आसपास की जमीन कमजोर हो गई थी। हादसे से एक दिन पहले हुई बारिश के कारण मिट्टी गीली थी, ऐसे में पोल के गिरने का खतरा और बढ़ गया था। खेत मालिक का दावा है कि सड़क उसकी जमीन में बना दी गई थी, इसलिए उसने मिट्टी काटी थी। बताया जाता है कि जिस स्थान पर भगदड़ मची, वहां करीब 200 मीटर तक रास्ता कच्चा है। जमीन से जुड़े विवाद के कारण ही वहां पक्की सड़क नहीं बन सकी है।

जेई बोले- पोल टेढ़ा होने की जानकारी थी

बिजली विभाग के जेई नवीन केवट ने बताया कि उन्हें पोल के टेढ़े होने की जानकारी थी। उनके अनुसार, सोमवार को श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने की सूचना मिलने के बाद शाम 6:09 बजे लाइनमैन को मौके पर भेजा गया था। उनका दावा है कि पोल की बिजली लाइन भी काट दी गई थी। हालांकि, अब सवाल यह उठ रहा है कि जब पोल के टेढ़े होने की जानकारी पहले से थी, तो उसे सीधा या सुरक्षित क्यों नहीं किया गया? उसे सहारा देकर मजबूत क्यों नहीं किया गया? श्रद्धालुओं की आवाजाही वाले रास्ते को पोल से दूर क्यों नहीं किया गया? जानकारी के अनुसार, नवीन केवट ने करीब 15 दिन पहले ही इस क्षेत्र का कार्यभार संभाला था। जांच में यह भी स्पष्ट होना जरूरी है कि उन्हें पोल की खराब स्थिति की जानकारी कब मिली और जानकारी मिलने के बाद उनकी ओर से क्या कार्रवाई की गई।

दो ट्रेनें पहुंचीं, बढ़ा भीड़ का दबाव

सावन की तीसरी सोमवारी पर अशोक धाम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे। मंदिर से करीब एक किलोमीटर पहले संकरी सड़क पर श्रद्धालुओं की भीड़ जमा थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एक कतार की जगह तीन-तीन लाइनें बन गई थीं।

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इसी बीच अशोक धाम हाल्ट पर दो ट्रेनें पहुंचीं। दोनों ट्रेनों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उतरे और मंदिर की ओर बढ़ने लगे। इससे भीड़ का दबाव और बढ़ गया। इसी दौरान प्रवेश द्वार पर लगी बांस की बैरिकेडिंग टूट गई और बिजली का पोल खेत की ओर गिर गया।

करंट की अफवाह ने बढ़ाई दहशत

पोल गिरने के बाद किसी ने वहां करंट फैलने की बात कह दी। देखते ही देखते यह बात भीड़ में अफवाह के रूप में फैल गई और श्रद्धालुओं के बीच दहशत पैदा हो गई। पोल गिरने वाली जगह से करीब 50 मीटर दूर बड़ी संख्या में महिला श्रद्धालु मौजूद थीं।
करंट के डर से लोग बचने के लिए भागने लगे। पीछे से आ रही भीड़ का दबाव बढ़ने के कारण कई महिलाएं जमीन पर गिरती चली गईं। कुछ ही देर में स्थिति भयावह भगदड़ में बदल गई। जमीन पर गिरी महिलाओं को पीछे से आ रही भीड़ संभलने का मौका नहीं दे सकी।

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इसी भगदड़ में सात महिला श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि 25 श्रद्धालु घायल हो गए।

हादसे की टाइमलाइन को लेकर प्रत्यक्षदर्शी और प्रशासन के बयान अलग

हादसे की टाइमलाइन को लेकर भी सवाल बना हुआ है। जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार के अनुसार, दो ट्रेनों से श्रद्धालुओं के आने और लाइन में आगे बढ़ने की होड़ के कारण अफरातफरी की स्थिति बनी। इसके बाद बैरिकेडिंग टूटने के दौरान बिजली का पोल गिरा और फिर करंट की अफवाह के कारण करीब 50 मीटर दूर भगदड़ मच गई। वहीं, प्रत्यक्षदर्शी दिवाकर सिंह का कहना है कि करंट की अफवाह बाद में फैली, जबकि उससे पहले ही भीड़ में भगदड़ जैसी स्थिति बन चुकी थी। ऐसे में जांच के सामने अहम सवाल यह है कि भगदड़ की पहली वजह आखिर क्या थी—भीड़ का दबाव, बैरिकेडिंग का टूटना, बिजली के पोल का गिरना या फिर करंट की अफवाह?

CCTV नहीं होने से जांच के सामने बड़ी चुनौती

घटनास्थल पर CCTV कैमरे नहीं होने के कारण जांच और मुश्किल हो गई है। अब यह पता लगाना चुनौतीपूर्ण होगा कि पोल कब गिरा, बैरिकेडिंग किस समय टूटी, श्रद्धालु कब दौड़ने लगे और करंट की अफवाह किसने और किस समय फैलाई।
अगर घटनास्थल पर CCTV कैमरे लगे होते तो हादसे की मिनट-दर-मिनट तस्वीर सामने आ सकती थी। अब जांच टीम को प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों, मोबाइल से बनाए गए वीडियो और विभागीय रिकॉर्ड के आधार पर पूरी टाइमलाइन तैयार करनी होगी।

सिर्फ पुलिस बल बढ़ाने से नहीं सुलझेंगे सुरक्षा के सवाल

हादसे के बाद अशोक धाम हाल्ट और मंदिर परिसर के आसपास पुलिस बल बढ़ा दिया गया है। हालांकि, सुरक्षा व्यवस्था की मूल खामियों को लेकर सवाल अभी भी कायम हैं। सावन की सोमवारी पर हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की जानकारी पहले से थी। इसके बावजूद संकरी सड़क, कई कतारें, कमजोर बैरिकेडिंग और जोखिम वाले बिजली के पोल के बीच श्रद्धालुओं की भीड़ को वहां क्यों आने दिया गया? यह सवाल अब जांच के केंद्र में है।

जांच टीम को तय करनी होगी जिम्मेदारी

त्रि-सदस्यीय जांच टीम के सामने अब केवल भगदड़ की वजह तलाशना ही पर्याप्त नहीं होगा। जांच में यह भी देखना होगा कि बिजली के पोल की स्थिति की जानकारी किस-किस अधिकारी को थी, मिट्टी काटे जाने के बाद कोई निरीक्षण किया गया था या नहीं, लाइनमैन ने मौके पर जाकर क्या रिपोर्ट दी, सावन की सोमवारी से पहले बिजली व्यवस्था की समीक्षा हुई थी या नहीं और भीड़ नियंत्रण की योजना किस स्तर पर तैयार की गई थी। सात महिलाओं की मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर खतरा करीब 20 दिन से मौजूद था, तो उसे हादसे में बदलने से पहले रोकने की जिम्मेदारी आखिर किसकी थी? अब जांच में इसी सवाल का जवाब तलाशना सबसे जरूरी होगा।

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