विधानसभा चुनाव के बीच दुर्गा विसर्जन को लेकर मुंगेर में हुई हिंसा ने पूरे देशभर का ध्यान अपनी तरफ खींचा है। लेकिन ये शहर आज जितना सुर्खियों में है उससे ज्यादा पहले भी चर्चित रह चुका है। गंगा किनारे बसे इस शहर को कभी मोदगिरी के नाम से जाना जाता था। महाभारत के सभापर्व और दिग्विजय पर्व में भी इस शहर का उल्लेख मिलता है, जब बाहुबली भीम ने अंग के राजा कर्ण को पराजित किया तो उसके पश्चात उसकी लड़ाई मोदगिरी में मौदगल्य के साथ हुई। उस समय का मोदगिरी ही आज का मुंगेर है। उद्योगों की बात करें तो एक समय ऐसा भी था कि इस क्षेत्र को बंगाल के बर्मिंघम (इंग्लैंड में उद्योगों के लिए मशहूर शहर) के रूप में जाना जाता था। यह बात बिहार-बंगाल विभाजन से पहले की है। एशिया का सबसे बड़ा रेलवे वर्कशॉप (जमालपुर रेल कारखाना) भी इस शहर के औद्योगिक रूप से मजबूत होने की कहानी बयां करती है। अंग्रेजों ने देश में पहली रेल लोकोमोटिव कार्यशाला खोलने के लिए मुंगेर जिले के जमालपुर को चुना क्योंकि यहां दक्ष कामगार उपलब्ध थे।
दक्षिणी बिहार में आने वाला यह शहर मुंगेर प्रमंडल का मुख्यालय है। मुंगेर प्रमंडल के अंतर्गत छह जिले आते हैं- मुंगेर, जमुई, खगड़िया, लखीसराय, बेगूसराय और शेखपुरा। मुंगेर को योगनगरी भी कहा जाता है। जिले में स्थित योग विद्यालय दुनिया के श्रेष्ठ योग संस्थानों में से एक है।