महागठबंधन की रैली में अल्पसंख्यक समुदाय से भी हजारों लोग जुटे।
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अब जानिए क्या है समीकरण और क्या जाएगा संदेश
दरअसल, सीमांचल (पूर्णिया+कटिहार+किशनगंज+अररिया) की 19 विधानसभा सीटों पर मुसलमान मतदाता हमेशा निर्णायक की भूमिका में रहते हैं। इतना ही नहीं, कोसी (मधेपुरा+सहरसा+सुपौल) की 18 सीटों पर भी मुस्लिम मतदाता चुनाव रिजल्ट को प्रभावित करते आ रहे हैं। लोकसभा की 6 सीटों पर ऐसा ही हाल है। ओवैसी की पार्टी ने विधानसभा 2020 में 20 सीटों पर चुनाव लड़ा था। इनमें से 5 सीटों पर AIMIM को सफलता हाथ लगी थी। वहीं राजद के खाते में 9 सीट तो NDA (उस वक्त जदयू भाजपा के साथ थी) को 6 जगह जीत मिली थी। AIMIM ने 5 सीटें लाकर सबको चौंका दिया था। 2020 विधानसभा चुनाव से पहले राजद और जदयू को विश्वास था कि मुस्लिम इनके कोर वोटर हैं, लेकिन ओवैसी की पार्टी की सीमांचल में इंट्री से यह दोनों पार्टियां दंग रह गई। हालांकि, AIMIM के 5 में से 4 विधायक कुछ समय बाद राजद में जाकर मिल गए। लेकिन, ओवैसी की पार्टी का मुस्लिम वोटरों के बीच राजनीतिक ग्राफ तेजी बढ़ा है। लालू और नीतीश यह समझ गए हैं कि लोकसभा और विधानसभा में बहुमत के लिए कोसी-सीमांचल में जीत पक्की करना काफी महत्वपूर्ण है। इसलिए लालू और नीतीश ने शनिवार को दिए गए अपने भाषण में अल्पसंख्यकों पर ज्यादा फोकस किया। उन्हें शिक्षा और रोजगार देने का वादा किया। साथ ही औवेसी का नाम लिए बगैर ही उनपर कड़ा हमला किया। अब राजद और जदयू ने नाम लिए बिना ही यह संदेश दिया कि AIMIM मुस्लिम समुदाय को इधर-उधर करने की कोशिश कर रही है। उन्हें भटका रही है। लोगों को बांटकर देश में नफरत पैदा करना चाहती है। ऐसे लोगों को वोट न दे। आपकी जरूरतों को हम पूरा करेंगे।