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Minority on Target : शाह न बिगाड़ दें गणित, इसलिए लालू के साथ नीतीश ने भी कही ऐसी बात

Sun, 26 Feb 2023 06:53 AM IST
आदित्य आनंद आदित्य आनंद, पूर्णिया

सार

Bihar: कोसी-सीमांचल के कई जिलों को अल्पसंख्यक बहुल माना जाता है। गृह मंत्री अमित शाह की पिछली जनसभा के बाद अब जब महागठबंधन ने 2024 के चुनाव के हिसाब से अपनी पहली रैली प्लान की तो सीमांचल को लक्ष्य किया। 
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लालू प्रसाद और नीतीश कुमार। (फाइल फोटो) - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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कोसी-सीमांचल के कई जिलों को अल्पसंख्यक बहुल माना जाता है। गृह मंत्री अमित शाह की पिछली जनसभा के बाद अब जब महागठबंधन ने 2024 के चुनाव के हिसाब से अपनी पहली रैली प्लान की तो सीमांचल को लक्ष्य किया। अबतक ऐसी रैलियां पटना में होती थीं, लेकिन इस बार महागठबंधन ने पूर्णिया में की। अल्पसंख्यक लक्ष्य थे और महारैली में उनकी भीड़ भी दिखी। भीड़ के बीच उर्दू शिक्षकों का हंगामा भी दिखा। लेकिन, इन सबसे ज्यादा जो बात चिह्नित हुई, वह यह कि राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी अल्पसंख्यकों को एकजुट करने का आह्वान करते दिखे। जानें क्या किसने बोला और क्या जाएगा संदेश…

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राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद के बोल
हमें बाबा साहब अंबेडकर के संविधान को बचाना है। हमें देश को बचाना है, बिहार को बचाना है। माइनॉरिटी की रक्षा करना है। लोग बोलते हैं हिन्दू, हिन्दू, हिन्दू। हमलोग हिन्दू हैं, लेकिन माइनरिटी का क्या अपराध है कि उसे खत्म करना चाहते हो? उसे अलग करने की कोशिश कर रहे हो! टुकड़ा-टुकड़ा करने की कोशिश कर रहे हो! यह हम कभी नहीं होने देंगे। अब समय आ गया है नरेंद्र मोदी सरकार के जाने का। यह बिहार का आह्वान है। यह महागठबंधन का एलान है। यह संकल्प लेकर आप सभी पूर्णिया से निकलिए कि आने वाले चुनाव में सारी सीटों पर हमारी जीत हो।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बोल
यह लोग हिंदू-मुस्लिम को लड़वाकर देश को बर्बाद करना चाहते हैं। आजकल मुस्लिम समुदाय में भी इधर-उधर करने की कोशिश हो रही है। एक पार्टी है जो भाजपा के लिए काम कर रही है। जिनके 5 विधायकों में से 4 विधायक अब महागठबंधन के साथ हैं। कभी भी ऐसे लोगों की बातों में नहीं आइएगा। ये लोगों को बांटकर देश में नफरत पैदा करना चाहते हैं। सीमांचल के इन चार जिलों में यह चर्चा थी कि इसको भी अलग किया जाएगा। ऐसी कोई बात नहीं है। सबको मिलकर रहना है। जो लोग इधर-उधर करना चाहते हैं, वह अपने मंसूबे में कामयाब नहीं होंगे। हमलोग आपके हित में काम करते रहेंगे। हम आपलोगों के हित में जीवनभर काम करेंगे। अल्पसंख्यक समुदाय के अधिक से अधिक लोगों को शिक्षित करने एवं मदरसा शिक्षकों की बेहतरी के लिए काफी काम किया गया। हमलोग विकास कार्यों के प्रति संकल्पित हैं। यह सोशल मीडिया का दौर है, एक दूसरे के प्रति प्रेम और भाइचारे का माहौल कायम रखें। दुष्प्रचार करने वालों के चक्कर में न पड़े। आपकी जो भी जरूरते हैं, उसे पूरा किया जाएगा। गड़बड़ करने वालों के खिलाफ आवाज बुलंद करते रहेंगे। 

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महागठबंधन की रैली में अल्पसंख्यक समुदाय से भी हजारों लोग जुटे। - फोटो : अमर उजाला
अब जानिए क्या है समीकरण और क्या जाएगा संदेश
दरअसल, सीमांचल (पूर्णिया+कटिहार+किशनगंज+अररिया) की 19 विधानसभा सीटों पर मुसलमान मतदाता हमेशा निर्णायक की भूमिका में रहते हैं। इतना ही नहीं, कोसी (मधेपुरा+सहरसा+सुपौल) की 18 सीटों पर भी मुस्लिम मतदाता चुनाव रिजल्ट को प्रभावित करते आ रहे हैं। लोकसभा की 6 सीटों पर ऐसा ही हाल है। ओवैसी की पार्टी ने विधानसभा 2020 में 20 सीटों पर चुनाव लड़ा था। इनमें से 5 सीटों पर AIMIM को सफलता हाथ लगी थी। वहीं राजद के खाते में 9 सीट तो NDA (उस वक्त जदयू भाजपा के साथ थी) को 6 जगह जीत मिली थी। AIMIM ने 5 सीटें लाकर सबको चौंका दिया था। 2020 विधानसभा चुनाव से पहले राजद और जदयू को विश्वास था कि मुस्लिम इनके कोर वोटर हैं, लेकिन ओवैसी की पार्टी की सीमांचल में इंट्री से यह दोनों पार्टियां दंग रह गई। हालांकि, AIMIM के 5 में से 4 विधायक कुछ समय बाद राजद में जाकर मिल गए। लेकिन, ओवैसी की पार्टी का मुस्लिम वोटरों के बीच राजनीतिक ग्राफ तेजी बढ़ा है। लालू और नीतीश यह समझ गए हैं कि लोकसभा और विधानसभा में बहुमत के लिए कोसी-सीमांचल में जीत पक्की करना काफी महत्वपूर्ण है। इसलिए लालू और नीतीश ने शनिवार को दिए गए अपने भाषण में अल्पसंख्यकों पर ज्यादा फोकस किया। उन्हें शिक्षा और रोजगार देने का वादा किया। साथ ही औवेसी का नाम लिए बगैर ही उनपर कड़ा हमला किया। अब राजद और जदयू ने नाम लिए बिना ही यह संदेश दिया कि AIMIM मुस्लिम समुदाय को इधर-उधर करने की कोशिश कर रही है। उन्हें भटका रही है। लोगों को बांटकर देश में नफरत पैदा करना चाहती है। ऐसे लोगों को वोट न दे। आपकी जरूरतों को हम पूरा करेंगे। 
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