भागलपुर में चूड़ा की वेरायटी के बीच कतरनी का जलवा।
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धान की खेती कम, मगर चूड़ा का बाजार गरम
मकर संक्रांति को लेकर भागलपुर के बाजार में चार दिनों से चल रही चहलपहल शनिवार को चरम पर रही। दूसरे जिलों से भी लोग संक्रांति को लेकर भागलपुर आकर कतरनी चूड़ा खरीदकर ले जा रहे हैं। इस साल करतनी चूड़ा 90से 110 रुपये प्रति किलो की दर से मिल रहा है। मालभोग कतरनी चूड़ा 100 से 120 रुपये प्रति किलो की दर पर बिका। इस वर्ष धान का ज्यादा उत्पादन नहीं होने के कारण किसानों को नुकसान भी झेलना पड़ा है, लेकिन बाजार भाव पर इसका ज्यादा असर नहीं है। खुदरा विक्रेता महासंघ, बिहार के महासचिव रमेशचंद्र तलरेजा बताते हैं कि पैकेट वाले महंगे चूड़े-पोहे-चिउरा आदि से ज्यादा मकर संक्रांति पर लोग लोकल किसानों के उत्पादित धान का चूड़ा लेना पसंद करते हैं। इसमें कतरनी चूड़ा का बाजार थोड़ा अलग ही है।
गया से निकल ब्रांड बन बिक रहा तिलकुट
गया में तिलकुट के बाजार का भी यही हाल है। गली-गली में तिलकुट का ऐसा बाजार सजा है कि शनिवार को शहर से आना-जाना लोगों के लिए मुश्किल रहा। दूसरे शहर से भी लोग गया आकर तिलकुट ले जा रहे हैं। खोआ तिलकुट और गुड़ तिलकुट की मांग ज्यादा है, हालांकि सामान्य तिलकुट की बिक्री बहुत ज्यादा हो रही है। गया से निकल तिलकुट उत्पादन का एक स्टार्टअप अब बाकी शहरों में आउटलेट खोलकर सामान बेच रहा है, जिसके कारण गया में बाहर से आने वालों की भीड़ का दबाव कुछ घटा भी है। बेगूसराय, खगड़िया में मकर संक्रांति पर चीनी से बनी सफेद मिठाई बंगला के लिए भी भीड़ उमड़ रही है। राजधानी पटना में मीठापुर गुमटी और कदमकुआं के बाजार में मकर संक्रांति के लिए खरीदारों की भारी भीड़ शनिवार रात 10 बजे तक दिखी। लखराम किराना स्टोर पटना के दिनेश कुमार ने बताया कि इस बार मकर संक्रांति ने तिलकुट में कई स्टार्टअप खड़े किए। कुछ लोकल प्रोडक्ट का ब्रांड के रूप में भी लोगों ने स्वागत किया।