बिहार में 17 सालों तक दोस्ती के बाद राजनीतिक दुश्मन बने भाजपा और जदयू कार्यकर्ता अब एक दूसरे से सड़कों पर निपट रहे हैं। इन दोनों दलों के अलगाव ने प्रदेश की जनता का मनोबल भी तोड़ दिया है।
लोगों को राज्य में विकास, सुशासन की गाड़ी पटरी से उतरने का डर सता रहा है। साथ ही लोग आशंकित हैं कि कहीं यह लड़ाई लालू युग की वापसी न करा दे।
जदयू भाजपा के अलगाव पर हाजीपुर में नयां गांव के रहने वाले संजीव कुमार तपाक से कहते हैं कि यह बिल्कुल भी अच्छा नहीं हुआ। हमने दोनों दलों के गठबंधन की सरकार के लिए वोट दिया था किसी एक व्यक्ति या दल को नहीं। दो की लड़ाई में तीसरे (लालू यादव) को फायदा हो जाएगा।
कोयला मोहन के संजय कुमार सिंह के मुताबिक नीतीश सरकार बहुत अच्छा काम कर रही थी। टूट गलत हुई। अगर बिहार को विशेष राज्य का दर्जा मिलता है तो नीतीश को समर्थन मिलेगा।
बांका के आसिफ हुसैन पूछने पर कहते हैं कि नेता लोगों की बातें वही जानें हमें तो रोजी रोटी कमानी है। लेकिन नीतीश ने अच्छा काम किया है।
सराय निवासी प्रहलाद तिवारी और नित्यानंद कहते हैं कि गठबंधन जारी रखना चाहिए था। टूट के लिए वह दोनों दलों को जिम्मेदार मानते हैं। राघोपुर प्रखंड के सुरेश राय के अनुसार यह गठबंधन लंबा चलने वाला था।
बलवा कुमारी के मोहन माथुर, शिवकुमार भगत, हाजीपुर के वकील संजीव कुमार, ब्रज किशोर चौधरी, धर्मवीर जैसे तमाम लोगों को अराजकता का डर सता रहा है।
पटना शहर के चैतन्य सिंह, डा. अमूल्य कुमार सिंह, पुष्पा तिवारी, अभय पाठक, राजेश कुमार, श्वेता तिवारी ने नीतीश के फैसले को गलत बताया, वहीं नुसरत, शशि शर्मा, सृष्टि सौम्या, शशि कुमार जैसे लोग नीतीश के फैसले का समर्थन करते हुए भी मिले।
वैशाली जिला मुख्यालय में काम करने वाले राज कपूर राज के मुताबिक, नीतीश कच्चे खिलाड़ी नहीं हैं।