काफी लंबे समय के बाद जिले में नजर आ रहे प्रवासी परिंदों के लिये हैबीटेट की कमी पड़ रही है। यहां जंगल और जलाशय दोनों ही सिकुड़ रहे हैं। पक्षियों के लिये वास स्थलों की कमी के कारण उनका आना कम हो गया था।
इस संबंध में जानकारों का कहना है कि हिमालय व तराई क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर जंगल खत्म होने से पहाड़ों में भूस्खलन की घटनायें बढ़ी हैं। इससे बारिश के साथ बड़ी मात्रा में आने वाले सिल्ट ने पुराने जलाशयों को उथला बना दिया है। वहीं बढ़ती आबादी के कारण उथले जलाशयों का उपयोग अब खेती के लिये होने लगा है। संभव है कि इसी कारण इस क्षेत्र में प्रवासी परिंदों की संख्या लगातार घटती जा रही है।
इसके बावजूद भी इस बार कई स्थानों पर प्रवासी पक्षी नजर आये। रानीगंज के निकट कजरा धार में आइकार्नियां के कारण जलाशय तेजी के साथ उथला होता जा रहा है और यहां बड़ी संख्या में जल पक्षी रहते हैं। वहीं, जिले के अन्य स्थानों पर अधंगा, ह्विसलिंग टील, ड्रोंगो, आर्टोलन, स्नाइप, व्हाइट आइबिस, ब्लैक आइबिस, हार्नबिल राबिन, ओरियाल, कारमोरेंट, क्रो फेजेंट, किंग क्रो, ट्री पायस जैसे पक्षी बड़ी संख्या में आते व प्रजनन करते हैं।