मौके पर देरी से पहुंची दमकल विभाग की टीम
- फोटो : अमर उजाला
‘झूठ बोलते रहे दमकल वाले’
स्थानीय लोगों का दावा है कि कई बार कॉल करने के बाद भी रात करीब 01:30 बजे दमकल की पहली गाड़ी प्रतापगंज से पहुंची। वहीं, इसके 15 मिनट बाद वीरपुर से दूसरी बड़ी गाड़ी और उसके 10 मिनट बाद तीसरी छोटी गाड़ी पहुंची। लोगों ने दावा किया कि रात 12:20 बजे से दमकल टीम के पहुंचने तक कई बार मोबाइल नंबर 7485805851 पर कॉल किया गया। लेकिन हर बार झूठ बोला जाता रहा। यहां तक कि दमकल की टीम ने कॉल पर डायल 112 की टीम द्वारा उन्हें वापस लौटाने की बात तक कह दी। दमकल की टीम जब तक घटनास्थल पर पहुंची, आग पर काबू पा लिया गया था। हालांकि, इसके बावजूद आग को पूरी तरह बुझाने के लिए दमकल की टीम को करीब एक घंटे तक मशक्कत करनी पड़ी।
थानाध्यक्ष बोले- छुट्टी पर था ड्राइवर
इधर, प्रतापगंज थानाध्यक्ष प्रमोद झा ने बताया कि अग्निशमन गाड़ी का चालक छुट्टी पर था। बावजूद वैकल्पिक व्यवस्था के तहत निजी ड्राइवर को दमकल गाड़ी के साथ घटनास्थल के लिए भेजा गया। थानाध्यक्ष के अनुसार, पहले फोन पर आग लगने की सूचना दी गई और फिर कुछ देर बाद बताया गया कि आग बुझ गई है। इसी वजह से अग्निशमन टीम को पहुंचने में देरी हुई।
दमकल विभाग के कर्मचारियों ने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप
- फोटो : अमर उजाला
अधिकारी बोले- मामले की होगी जांच
वहीं, जिला अग्निशमन पदाधिकारी संदीप कुमार ने बताया कि सुपौल के अतिरिक्त उन्हें सहरसा और मधेपुरा जिले का भी प्रभार है। तीन जिलों का प्रभार होने की वजह से मामला उनके संज्ञान में नहीं है। लेकिन अगर टीम सूचना के बावजूद देर से पहुंची है तो यह गंभीर विषय है। इसकी जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।