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Bihar Cabinet : सहरसा के 79 गांवों में जमीन की खरीद-बिक्री और मकान निर्माण पर रोक, कौन-सी जमीन चिह्नित?

Thu, 23 Apr 2026 06:13 AM IST
कोसी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहरसा

सार

Bihar News : बिहार कैबिनेट के एक फैसले से लाखों लोगों के पैरों तले जमीन खिसक गई है। सहरसा में ग्रीनफील्ड टाउनशिप के लिए राज्य सरकार ने तीन प्रखंडों के 79 गांवों की जमीन खरीद-बिक्री तो रोकी ही, यहां निर्माण भी रोक दिया है।
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सहरसा (सांकेतिक तस्वीर)
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विस्तार
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बिहार सरकार ने सहरसा सहित राज्य के कई शहरों के विस्तार और सुनियोजित विकास के लिए एक ऐतिहासिक और कठोर कदम उठाया है। बुधवार को हुई राज्य कैबिनेट की अहम बैठक में कुल 22 एजेंडों पर मुहर लगाई गई। इस बैठक से सहरसा के लिए जो सबसे बड़ी खबर सामने आई है, वह यह है कि सरकार ने टाउनशिप वाले क्षेत्रों में जमीन की खरीद-बिक्री, हस्तांतरण और नए भवनों के निर्माण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।

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31 मार्च 2027 तक लागू रहेगी पाबंदी
कैबिनेट के इस बड़े फैसले के बाद नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार ने आधिकारिक प्रेस नोट जारी किया है। इसके मुताबिक, पुराने सहरसा शहर पर बढ़ती आबादी और ट्रैफिक के भारी दबाव को कम करने के लिए शहर से सटे बाहरी इलाकों में एक आधुनिक 'ग्रीनफील्ड' और 'सैटेलाइट टाउनशिप' बसाने की तैयारी है। जब तक इस नए इलाके का मास्टर प्लान तैयार कर उसे अधिसूचित नहीं कर दिया जाता, यानी 31 मार्च 2027 तक, इन विशेष और कोर क्षेत्रों में किसी भी तरह के निर्माण या जमीन की रजिस्ट्री पर सख्ती से पाबंदी रहेगी।

इन तीन प्रखंडों के 79 गांव आएंगे जद में
सहरसा टाउनशिप के इस वृहद मास्टर प्लान में शहर के समीपवर्ती ग्रामीण इलाकों को शामिल किया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस नए विस्तार के लिए कुल 79 गांवों को चिह्नित किया गया है। ये गांव मुख्य रूप से कहरा, सत्तरकटैया और सौरबाजार प्रखंड के अंतर्गत आते हैं। सरकार की योजना इन ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों को अत्याधुनिक सैटेलाइट टाउनशिप में तब्दील करने की है।
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महानगरों की तर्ज पर मिलेंगी सुविधाएं, बढ़ेगा रोजगार
सरकार का मुख्य लक्ष्य सहरसा में बेतरतीब और बिना नक्शे के बस रही कॉलोनियों को रोकना है। 'बिहार शहरी आयोजना तथा विकास अधिनियम' के तहत लिए गए इस फैसले से अब यहां योजनाबद्ध तरीके से काम होगा। मास्टर प्लान आधारित विकास से इन इलाकों में चौड़ी सड़कें, पार्क, आधुनिक जल निकासी (ड्रेनेज) प्रणाली, अस्पताल और व्यवस्थित आवासीय कॉलोनियां विकसित की जाएंगी। सरकार का मानना है कि इस ग्रीनफील्ड टाउनशिप के जरिए आर्थिक गतिविधि के नए केंद्र बनेंगे, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे और निवेश बढ़ेगा।

चार लाख 61 हजार लोगों को मिलेगा लाभ
इस आयोजना में सहरसा नगर और आसपास की कुल 4,61,052 की जनसंख्या को शामिल किया गया है। कुल 294.19 वर्ग किमी क्षेत्रफल वाली इस योजना में 35.89 वर्ग किमी शहरी क्षेत्र और 258.30 वर्ग किमी ग्रामीण क्षेत्र शामिल है। इसमें सत्तरकटैया अंचल के 21, कहरा अंचल के 34 और सौरबाजार अंचल के 24 राजस्व ग्रामों को रखा गया है। प्लानिंग एरिया में इन 79 गांवों को शामिल किए जाने के बाद यहां शहर की भांति बेहतर खेल के मैदान, पार्क, कॉलोनी, पेयजल, निर्बाध विद्युत आपूर्ति और बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इन गांवों को चिह्नित कर जिला प्रशासन ने पहले ही सरकार को प्रस्ताव भेज दिया था।

प्रॉपर्टी बाजार और जमीन मालिकों में मची खलबली
सरकार के इस अचानक आए फैसले से कहरा, सत्तरकटैया और सौरबाजार प्रखंड के उन 79 गांवों में खलबली मच गई है, जो टाउनशिप के दायरे में आते हैं। जमीन के कारोबार से जुड़े लोगों, बिल्डरों और अपनी गाढ़ी कमाई से वहां घर बनाने का सपना देख रहे आम लोगों को तगड़ा झटका लगा है। उन्हें मास्टर प्लान पास होने तक लंबा इंतजार करना पड़ेगा। हालांकि, नगर नियोजकों और जानकारों का कहना है कि भविष्य में एक सुंदर, जाम-मुक्त और व्यवस्थित सहरसा शहर के निर्माण के लिए यह एक बेहद जरूरी कदम था।

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