समाज में प्रचलित बोझिल परंपराओं को खत्म कर सादगी और सामाजिक जागरूकता की मिसाल पेश करते हुए सहरसा जिले के पतरघट प्रखंड के किशनपुर गांव के लोगों ने एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से तय किया कि अब गांव में किसी भी मृत्यु के बाद मृत्यु भोज (तेरही भोज) का आयोजन नहीं किया जाएगा। इसके स्थान पर केवल सम्पिंडन के दिन शांति भोज का आयोजन किया जाएगा।
मृत्यु भोज बनता है गरीबों पर बोझ
गांव में हुई एक सामूहिक बैठक में इस मुद्दे पर गंभीर विचार-विमर्श किया गया। ग्रामीणों का कहना था कि मृत्यु भोज की परंपरा खासकर गरीब और असमर्थ परिवारों पर आर्थिक बोझ बन जाती है। शोक के समय परिवार मानसिक रूप से पहले ही टूट चुका होता है, ऐसे में भोज के आयोजन की तैयारी करना और आर्थिक संसाधन जुटाना उनके लिए दोहरी पीड़ा बन जाता है।
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शोक के समय भोज– सामाजिक विडंबना
ग्रामीणों ने यह भी कहा कि जब परिवार किसी सदस्य की मृत्यु के गहरे शोक में डूबा होता है, तब भोज जैसा आयोजन करना न केवल असंवेदनशील प्रतीत होता है, बल्कि शोक की भावना को भी क्षति पहुंचाता है। उन्होंने इस परंपरा को ‘खुशी जैसा भोज, शोक के समय’ करार देते हुए इसे समाज के लिए अनुचित बताया।
मृत्यु भोज की जगह होगा शांति भोज
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि अब से मृत्यु भोज की परंपरा को पूर्ण रूप से खत्म किया जाएगा। अब केवल सम्पिंडन (पिंडदान) के दिन एक सादा शांति भोज किया जाएगा, जिसमें सामाजिक दिखावे या खर्चीले इंतजामों से बचा जाएगा। इसका उद्देश्य सामाजिक समानता और मानसिक शांति को प्राथमिकता देना है।
संकल्प के साथ जागरूकता अभियान की शुरुआत
बैठक में मौजूद लोगों ने संकल्प लिया कि वे इस फैसले को पूरे गांव में लागू करेंगे और हर परिवार को इसके लिए जागरूक करेंगे। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि वे मृत्यु भोज के खिलाफ एक व्यापक सामाजिक जागरूकता अभियान शुरू करेंगे, जिससे दूसरे गांव भी इससे प्रेरित हो सकें।
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हर वर्ग के लोगों की भागीदारी
इस महत्वपूर्ण निर्णय में गांव के सभी वर्गों के लोगों ने एकजुट होकर भाग लिया। रविंद्र चरण मंडल, अरुण कुमार आनंद, गजेंद्र यादव, विजेंद्र मंडल, नुनुलाल सदा, विलास राम, बेचन शर्मा, संजय केशरी, रविशंकर कुमार, प्रकाश सदा, तपेश्वरी यादव, सुरेंद्र यादव, देवनारायण यादव, भूमि यादव, संजय यादव, आशीष यादव, राजीव कुमार, सिंटू कुमार, संजीव और लक्ष्मण सहित कई अन्य लोग इस पहल का हिस्सा बने और समाज में बदलाव लाने की दिशा में अपने कदम बढ़ाए।