रोटी की तलाश में उत्तर प्रदेश के प्रयागराज (इलाहाबाद) गए सहरसा जिले के मजदूरों के साथ एक बड़ा और दर्दनाक हादसा हो गया है। प्रयागराज के फाफामऊ थाना क्षेत्र स्थित ‘आदर्श कोल्ड स्टोरेज’ की छत अचानक गिर गई। इस भयानक हादसे में मलबे में दबकर कई मजदूरों की मौत हो गई है। शुरुआती जानकारी के अनुसार सहरसा जिले के सलखुआ प्रखंड के तीन मजदूरों की मौत हुई है, जबकि कई अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल हैं।
मलबे में दबे कई मजदूर, ज्यादातर सहरसा के निवासी
मिली जानकारी के अनुसार कोल्ड स्टोरेज में सैकड़ों मजदूर काम कर रहे थे। इनमें से अधिकांश सहरसा जिले के सलखुआ प्रखंड के अलग-अलग गांवों के रहने वाले थे। काम के दौरान अचानक भारी छत गिर गई और मजदूर मलबे में दब गए। घटना के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। पुलिस और प्रशासन ने तुरंत पहुंचकर राहत और बचाव कार्य शुरू किया। घायलों को प्रयागराज के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां कई की हालत गंभीर बताई जा रही है।
हादसे में जान गंवाने वाले मजदूर
स्थानीय जानकारी के अनुसार मृतकों में ये मजदूर शामिल हैं:
- बिलट चौधरी (35 वर्ष), पिता: विद्यानंद चौधरी, निवासी: पिपरा, सलखुआ
- मसिंद्र सदा (25 वर्ष), पिता: सक्को सादा, निवासी: बलियार, सलखुआ
- ज्योतिष कुमार (21 वर्ष), पिता: नुनुलाल सादा, निवासी: बलियार, सलखुआ
घायल मजदूरों की सूची
इस हादसे में घायल मजदूरों में पप्पू यादव, शिंकू यादव, अंकित कुमार, शिबू यादव, साहुल चौधरी, अमित चौधरी और आशू चौधरी शामिल हैं। ये सभी सलखुआ प्रखंड के अलग-अलग गांवों के रहने वाले हैं।
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गांवों में पसरा मातम
जैसे ही इस दर्दनाक घटना की खबर सलखुआ प्रखंड के पिपरा, खरहुरिया और बलियार गांव पहुंची, पूरे इलाके में मातम छा गया। जो लोग रोजी-रोटी कमाने बाहर गए थे, उनकी मौत की खबर सुनते ही परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल है। मृतकों के घरों में महिलाओं का रोना-पीटना जारी है और गांव में चूल्हे तक नहीं जले हैं। वहीं जिन मजदूरों की स्थिति की जानकारी नहीं मिल पाई है, उनके परिजन डरे हुए हैं और लगातार फोन कर अपने लोगों की खबर ले रहे हैं।
प्रशासन से मदद की मांग
इस हादसे के बाद खगड़िया सांसद प्रतिनिधि रितेश रंजन ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और हालात का जायजा लिया। उन्होंने सहरसा जिला प्रशासन और बिहार सरकार से मांग की है कि उत्तर प्रदेश सरकार और प्रयागराज प्रशासन से समन्वय कर घायलों का बेहतर इलाज कराया जाए। साथ ही मृतकों के शवों को जल्द उनके गांव लाने और परिवारों को उचित मुआवजा देने की मांग की गई है।