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Bihar: आवास योजना में अवैध वसूली पर बड़ा एक्शन, 500 रुपये रिश्वत लेने वाले आवास सहायक की सेवा समाप्त

Sat, 20 Jun 2026 09:19 AM IST
कोसी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मधेपुरा

सार

मधेपुरा के शंकरपुर प्रखंड में प्रधानमंत्री आवास प्लस योजना के सर्वेक्षण के दौरान लाभुकों से 500 रुपये वसूली के आरोप में ग्रामीण आवास सहायक टुनटुन मंडल की सेवा समाप्त कर दी गई है। वायरल वीडियो और जांच रिपोर्ट में आरोप सही पाए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई।

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बर्खास्त आवास सहायक - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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प्रधानमंत्री आवास प्लस योजना के सर्वेक्षण के दौरान लाभुकों से अवैध वसूली के आरोप में मधेपुरा जिले के शंकरपुर प्रखंड में तैनात ग्रामीण आवास सहायक टुनटुन मंडल को सेवा से हटा दिया गया है। जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद उनका अनुबंध तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया गया। कार्रवाई डीडीसी के निर्देश पर हुई जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है।
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मामला शंकरपुर प्रखंड की मौरा कवियाही पंचायत के वार्ड संख्या तीन से जुड़ा है। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में प्रधानमंत्री आवास प्लस योजना के सर्वेक्षण और सत्यापन के नाम पर लाभुकों से 500-500 रुपये लिए जाने का आरोप लगाया गया था।

शिकायत के बाद हुई जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला ग्रामीण विकास अभिकरण (डीआरडीए) के निदेशक ने मौके पर पहुंचकर जांच की। इस दौरान कई लाभुकों के बयान दर्ज किए गए। जांच के दौरान लाभुक सुनील कुमार, शंभू यादव, हरियर देवी, पवन देवी और उषा देवी ने बताया कि आवास योजना के सत्यापन के नाम पर उनसे 500-500 रुपये लिए गए थे।
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वीडियो में रुपये लेते दिखे कर्मी और वार्ड सदस्य
जांच प्रतिवेदन में उल्लेख किया गया है कि वायरल वीडियो में ग्रामीण आवास सहायक टुनटुन मंडल और स्थानीय वार्ड सदस्य लाभुकों से रुपये लेते हुए दिखाई दे रहे हैं। लाभुकों ने भी वीडियो में दिख रहे व्यक्ति की पहचान वार्ड सदस्य के रूप में की है। मामले में टुनटुन मंडल से स्पष्टीकरण मांगा गया। अपने जवाब में उन्होंने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि पंचायत की स्थानीय राजनीति और आगामी चुनाव को लेकर उन पर दबाव बनाया जा रहा था। उनका दावा था कि पूर्व मुखिया द्वारा अयोग्य लोगों का सत्यापन कराने का दबाव बनाया गया और विरोध करने पर उन्हें साजिश के तहत फंसाया गया।

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स्पष्टीकरण को नहीं माना गया संतोषजनक
टुनटुन मंडल ने यह भी कहा कि उनसे तीन लाख रुपये की मांग की गई थी और पैसे नहीं देने पर वीडियो वायरल कर दिया गया। हालांकि, डीआरडीए निदेशक ने उनके स्पष्टीकरण को असंतोषजनक और तथ्यहीन माना। जांच रिपोर्ट में कहा गया कि यदि किसी प्रकार का दबाव बनाया जा रहा था तो इसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को दी जानी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।

अनुबंध रद्द, अपील का मिला अधिकार
जांच में ग्रामीण आवास सहायक और स्थानीय वार्ड सदस्य की मिलीभगत से लाभुकों से अवैध राशि वसूले जाने की बात सामने आई। इसे प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) की गाइडलाइन का उल्लंघन माना गया।
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इसके बाद बिहार रूरल डेवलपमेंट सोसायटी के प्रावधानों के तहत टुनटुन मंडल को कार्य में घोर लापरवाही, कर्तव्यहीनता और विभागीय निर्देशों की अवहेलना का दोषी मानते हुए उनका अनुबंध तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया गया। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि संबंधित कर्मी 30 दिनों के भीतर जिला पदाधिकारी के समक्ष अपील दायर कर सकते हैं।
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