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Bihar: 162 फीट लंबी ऐतिहासिक कांवर यात्रा से गूंजा खगड़िया NH-31, सहरसा तक उमड़ा आस्था का जनसैलाब

Sat, 20 Sep 2025 01:17 PM IST
आशुतोष प्रताप सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला,खगड़िया

सार

खगड़िया NH-31 पर हजारों श्रद्धालुओं ने 162 फीट लंबी ऐतिहासिक कांवर के साथ बोल बम के जयघोष किए। कोशी डाक कांवरिया संघ के बैनर तले आयोजित इस यात्रा में सुपौल, सहरसा, मधेपुरा, खगड़िया और नेपाल से भी भक्त शामिल हुए।
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ऐतिहासिक कांवर यात्रा से गूंज उठा खगड़िया - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कोसी अंचल में आस्था का अद्वितीय दृश्य तब देखने को मिला जब शनिवार को NH-31 खगड़िया के बलुआही समीप हजारों श्रद्धालु 162 फीट लंबी ऐतिहासिक कांवर लेकर निकले। बोल बम के जयघोष, भगवा परिधान और आस्था की लहरों ने पूरे वातावरण को शिवमय कर दिया। कोशी डाक कांवरिया संघ के बैनर तले आयोजित इस यात्रा में सुपौल, सहरसा, मधेपुरा, खगड़िया सहित नेपाल से भी श्रद्धालु शामिल हुए। सभी ने मुंगेर के छर्रापट्टी घाट से गंगाजल भरकर बाबा नकुचेश्वर धाम महिषी और संत बाबा कारू धाम महापुरा तक काँवर यात्रा शुरू की।
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इस बार की यात्रा की विशेषता रही 162 फीट लंबी कांवर, जो क्षेत्र में पहली बार निकाली गई। कांवर के साथ सजाए गए वाहन, बैंड-बाजे और ढोल-नगाड़ों ने माहौल को और भव्य बना दिया। यात्रा के दौरान बलुआही में श्रद्धालुओं ने फलाहार किया और महादेव के जयकारों के साथ आगे बढ़े। चार दिवसीय यात्रा 19 सितंबर को मुंगेर घाट से शुरू हुई। 20 सितंबर को पूजा-अर्चना के बाद जत्था मां कात्यायनी मंदिर, सहरसा में रुका। 21 सितंबर को यात्रा उटेशरा, बहुअरवा हाई स्कूल में रात्रि विश्राम के बाद आगे बढ़ी। अंतिम दिन 22 सितंबर को बाबा नकुचेश्वर और संत बाबा कारू धाम में जलाभिषेक किया जाएगा।

अखिल भारतीय भगैत महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष देवनारायण यादव ने कहा कि यह आयोजन सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि महादेव की प्रेरणा और भक्तों की भावना का जीवंत प्रमाण है। महिषी के मुखिया नीतीश कुमार ने भी कहा कि यह यात्रा नेपाल तक आस्था की गूंज का प्रतीक है और सांस्कृतिक धरोहर बन चुकी है।
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यात्रा में छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों और महिलाओं तक ने भाग लिया। श्रद्धालुओं का कहना था कि वे कांवर नहीं बल्कि अपनी आस्था और विश्वास को बाबा तक पहुंचा रहे हैं। रास्ते भर स्थानीय लोगों ने जगह-जगह जल, फल, नाश्ता और विश्राम की व्यवस्था कर समाजिक समरसता का परिचय दिया। 162 फीट लंबी कांवर यात्रा ने कोशी अंचल के धार्मिक परिदृश्य में नया अध्याय जोड़ा और यह साबित कर दिया कि जब महादेव के भक्त निकलते हैं, तो पूरा वातावरण शिवमय हो जाता है।
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