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Bihar: सिविल सर्जन पर भ्रष्टाचार के आरोप, डीएम ने गठित की जांच कमेटी, आईएमए के आरोपों के बाद प्रशासन हरकत में

Wed, 27 May 2026 03:37 PM IST
कोसी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मधेपुरा

सार

मधेपुरा में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) द्वारा सिविल सर्जन डॉ. विजय कुमार पर लगाए गए भ्रष्टाचार और मनमानी के आरोपों के बाद डीएम अभिषेक रंजन ने जांच कमेटी गठित कर दी है।
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डीएम से मिलने पहुंचे आईएमए का सदस्य - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मधेपुरा में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) द्वारा सिविल सर्जन डॉ. विजय कुमार पर लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद जिला प्रशासन हरकत में आ गया है। डीएम अभिषेक रंजन ने पूरे मामले की जांच के लिए कमेटी गठित कर दी है। डीएम ने उप विकास आयुक्त, जिला योजना पदाधिकारी और राष्ट्रीय नियोजन कार्यक्रम के निदेशक को मामले की जांच कर जल्द रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।

डीएम कार्यालय से जारी पत्र में कहा गया है कि आईएमए के सचिव डॉ. अमित आनंद द्वारा दिए गए आवेदन में सिविल सर्जन पर निजी क्लीनिकों और नर्सिंग होम के लाइसेंस गैरकानूनी तरीके से जारी करने के आरोप लगाए गए हैं। प्रशासन ने इस मामले की संयुक्त जांच कर प्रतिवेदन सौंपने को कहा है।

आईएमए ने डीएम को सौंपा था ज्ञापन

दरअसल, मंगलवार को आईएमए के प्रतिनिधिमंडल ने डीएम को ज्ञापन सौंपकर सिविल सर्जन पर भ्रष्टाचार और मनमानी के आरोप लगाए थे। संगठन का कहना है कि निजी क्लीनिकों और नर्सिंग होम संचालकों पर अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है। आईएमए के अनुसार, जो लोग रिश्वत नहीं देते हैं उन्हें पंजीकरण रद्द करने की धमकी दी जाती है। संगठन ने आरोप लगाया कि चिकित्सकों को डर और दबाव में काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

क्लीनिक संचालकों को परेशान करने का आरोप

आईएमए ने कहा कि 40 बेड से कम क्षमता वाले अस्पतालों और क्लीनिकों के लिए पंजीकरण अनिवार्य नहीं है, इसके बावजूद डॉक्टरों और क्लीनिक संचालकों को परेशान किया जा रहा है। ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया कि विभागीय फाइलों को जानबूझकर लंबित रखा जाता है और बाद में दबाव बनाकर पैसे की मांग की जाती है। संगठन ने इसे चिकित्सकों के बीच भय और असंतोष का माहौल पैदा करने वाला बताया।

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निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग

आईएमए ने डीएम से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही डिस्ट्रिक्ट रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी की नियमित बैठक कराने और क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट के तहत किए गए कार्यों की समीक्षा कराने की भी मांग की गई है। संगठन ने चेतावनी दी है कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

सिविल सर्जन ने आरोपों को बताया निराधार

वहीं, सिविल सर्जन डॉ. विजय कुमार ने सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि विभागीय दिशा-निर्देशों के अनुसार निजी क्लीनिकों और नर्सिंग होम को जरूरी नियमों का पालन करने के लिए कहा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो संस्थान तय मानकों को पूरा नहीं कर रहे हैं, उन्हें सात दिनों का समय दिया गया है ताकि वे आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर सकें।

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