इंडो-नेपाल सीमा स्थित सुपौल जिले के वीरपुर हवाई अड्डे से जल्द ही हवाई सेवा की शुरुआत हो सकती है। मंगलवार को राज्य कैबिनेट ने इसको लेकर बड़ी पहल की है। कैबिनेट की बैठक में कुल 20 प्रस्तावों को स्वीकृति मिली है। जिसमें सुपौल के वीरपुर सहित कुल 06 हवाई अड्डों को उड़ान योजना के तहत छोटे हवाई अड्डा के रूप में विकास के लिए भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण नई दिल्ली और राज्य सरकार के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) को स्वीकृति दी गई है। इसमें वीरपुर के अलावा सहरसा, मधुबनी, मुंगेर, वाल्मीकिनगर और मुजफ्फरपुर हवाई अड्डा शामिल है।
पीएचईडी मंत्री सह छातापुर विधायक नीरज कुमार सिंह बबलू ने बताया कि इसके अलावा इसके अलावा वीरपुर हवाई अड्डे पर टर्मिनल भवन सहित अन्य सुविधाओं के विकास के लिए 25 करोड़ रुपए स्वीकृत किया गया है। इससे पूर्व बीते 23 मई को एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया की छह सदस्यीय टीम वीरपुर पहुंची थी। टीम ने यहां हवाई सेवाओं के मद्देनजर जरूरी जांच की। जिसके बाद टीम द्वारा बताए गए बिंदुओं पर जिला प्रशासन ने काम शुरु कर दिया है।
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सीएम ने प्रगति यात्रा के दौरान 20 जनवरी को की थी घोषणा
बीते 20 जनवरी को सीएम नीतीश कुमार प्रगति यात्रा के दौरान सुपौल में थे। इस दौरान सूबे के पीएचईडी मंत्री सह छातापुर विधायक नीरज कुमार सिंह बबलू की मांग पर उन्होंने वीरपुर हवाई अड्डा को उड़ान योजना के तहत विकसित करने की घोषणा की थी। इसके बाद 07 फरवरी को राज्य कैबिनेट की बैठक में वीरपुर हवाई अड्डा विस्तार के लिए सरकार 88.83 एकड़ जमीन अर्जित करने को स्वीकृति दी गई। वही इसके लिए राज्य सरकार द्वारा 42 करोड़ 37 लाख 79 हजार रुपए जारी किए गए। वीरपुर एसडीएम नीरज कुमार ने बताया कि 21 जून को एक विशेष टीम वीरपुर पहुंच रही है, जिसके बाद भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया औपचारिक तौर पर शुरु हो जाएगी। फिलहाल इसके मद्देनजर जमीन चिह्नित कर लिया गया है।
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88.83 एकड़ जमीन का होगा अधिग्रहण
वीरपुर में हवाई अड्डा विस्तार के लिए कुल 88.83 एकड़ जमीन अधिग्रहित की जाएगी। इसमें वीरपुर मौजा से 24.87 एकड़, पिपराही नाग से 44.77 एकड़ और परमानंदपुर मौजा से 19.19 एकड़ भूमि शामिल है। फिलहाल वीरपुर हवाई अड्डे पर रनवे की लंबाई 1200 मीटर और चौड़ाई 23 मीटर है। रनवे के उत्तर में 90 मीटर और दक्षिण में 85 मीटर जमीन खाली है। वर्तमान में एयरपोर्ट के पास 62.16 एकड़ जमीन उपलब्ध है, जो भूमि अधिग्रहण के बाद बढ़कर 150.16 एकड़ हो जाएगी। इससे रनवे की लंबाई तीन किलोमीटर तक बढ़ाई जा सकेगी, जिससे बड़े विमानों की लैंडिंग भी संभव हो पाएगी।
60 के दशक में बना वीरपुर का हवाई अड्डा
वीरपुर हवाई अड्डा 1960 के दशक में कोसी योजना के तहत बना था। उस समय डिकॉस्टा विमान से लेकर सामान्य विमान तक यहां उतर चुके हैं। वर्ष 1975 में तत्कालीन रेल मंत्री ललित नारायण मिश्र के निधन के बाद प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के आगमन पर यहां 18 हवाई जहाज और तीन हेलीकॉप्टर की लैंडिंग हुई। इससे पूर्व वर्ष 1969 में भारतीय वायुसेना के एक विमान की आपातकालीन लैंडिंग भी यहां कराई गई थी। हालांकि बाद के वर्षों में हवाई अड्डे के विकास पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया। वर्ष 2008 में यहां रनवे की मरम्मत पर 22 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे।
पीएचईडी मंत्री बोले- फिर से लौटेगा विकास
इधर, सूबे के पीएचईडी मंत्री सह छातापुर विधायक नीरज कुमार सिंह बबलू ने कैबिनेट के फैसले को केंद्र और राज्य सरकार की प्रतिबद्धता का परिचायक बताया है। उन्होंने कहा है कि वीरपुर और सहरसा हवाई अड्डा कोसी के इलाके में विकास का द्वार खोलेंगे। इससे क्षेत्र में रोजगार, पर्यटन, व्यापार और निवेश को गति मिलेगी। हमने जो कहा था, वह करके दिखा रहे हैं। काम बोलेगा और विकास फिर से लौटेगा। हवाई अड्डे का विकास पीएम नरेंद्र मोदी के क्षेत्रीय संतुलन पर आधारित विकास नीति और सीएम नीतीश कुमार के नेतृत्व में लिए जा रहे विकासोन्मुख फैसलों का परिणाम है। उम्मीद है कि जल्द ही छोटे-बड़े विमान सेवाओं की शुरुआत वीरपुर और सहरसा हवाई अड्डे से होगी।