Bihar : क्राइम मीटिंग में सभी थानों का हिसाब लिया जा रहा था। तभी एक थानाध्यक्ष उठ खड़े हुए और कहा कि सर मुझे इस थाना से हटाकर कहीं और भेज दीजिये। थानाध्यक्ष से वजह पूछी गई, तो जवाब भी मिला। अब थानाध्यक्ष पर कार्रवाई हुई है।
मधेपुरा के सिंहेश्वर थाने के थानेदार रौशन कुमार को एसपी ने अनुशासनहीनता एवं कर्तव्यहीनता के आरोप में निलंबित कर दिया है। पोस्टिंग के मात्र आठ दिन बाद ही उन पर यह कार्रवाई की गई है। पुलिस अधीक्षक संदीप सिंह ने मंगलवार को इस संबंध में आदेश जारी किया है।
दरअसल एक सितंबर 2025 को रौशन कुमार की प्रतिनियुक्ति सिंहेश्वर थाना में की गई थी। लेकिन 9 सितंबर को आयोजित अपराध गोष्ठी के दौरान वे उपस्थित हुए और गोष्ठी में ही यह कह दिया कि वे सिंहेश्वर थाना में कार्य नहीं करना चाहते। इस संबंध में पुलिस अधीक्षक द्वारा जब उनसे कारण पूछा गया तो थानाध्यक्ष ने कहा कि मुझे इस थाना में मैन नहीं लगता है इसलिए मुझे इस थाना से हटाकर दूसरे थाना में पदस्थापित किया जाय। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए एसपी ने कहा कि पुलिस एक अनुशासित बल होता है और इसमें पदस्थापित कर्मियों को यह चुनने का अधिकार नहीं होता कि उन्हें किस थाना या किस जगह पर काम करना है या नहीं करना है। पुलिस हस्तक नियमों के अनुसार हर पुलिस पदाधिकारी को दी गई जिम्मेदारियों का निर्वहन करना अनिवार्य है। ऐसे में रौशन कुमार का यह रवैया अनुशासनहीनता का प्रतीक है।
एसपी संदीप सिंह ने स्पष्ट किया कि सिंहेश्वर थाना में पदस्थापना से इंकार करना, वरिष्ठ अधिकारी के आदेशों की अवहेलना करना और कर्तव्य पालन से पीछे हटना सीधे तौर पर अनुशासनहीनता, कर्तव्यहीनता और आदेशो का उल्लंघन की श्रेणी में आता है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसी प्रवृत्तियों को अनदेखा किया गया तो पुलिस बल के भीतर अनुशासनहीनता को बढ़ावा मिलेगा। इन्हीं कारणों से रौशन कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबन की अवधि में उन्हें केवल जीवन-यापन भत्ता देय होगा और इस दौरान उनका मुख्यालय पुलिस केंद्र सिंहेश्वर निर्धारित किया गया है। मधेपुरा पुलिस अधीक्षक के इस कदम को लेकर पुलिस महकमे में चर्चा तेज हो गई है। अधिकारियों का मानना है कि पुलिस बल में अनुशासन सर्वोपरि है और अगर कोई भी पदाधिकारी नियमों की अवहेलना करता है तो उस पर कड़ी कार्रवाई आवश्यक है।