बिहार में विधानसभा चुनावों में शानदार जीत के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पांचवी बार बिहार की कमान संभालेंगे। उनके शपथ ग्रहण को लेकर पटना के गांधी मैदान में जबरदस्त तैयारियां चल रही हैं।
नीतीश ने समारोह को भव्य बनाने के लिए देशभर के राजनीतिक दिग्गजों को न्यौता भी भेजा है लेकिन हर किसी की निगाह इस बात पर टिकी हुई है कि मुख्यमंत्री की कैबिनेट में किसे-किसे जगह मिल पाती है।
इससे भी बढ़कर हर किसी के लिए सबसे बड़ा कौतूहल तो ये ही है कि क्या लालू के किसी लाल को उप मुख्यमंत्री की कुर्सी मिल पाती है या नहीं। लालू के विधायकों की संख्या भी नीतीश की जेडीयू से ज्यादा है ऐसे में इस बात पर भी हर किसी की नजरे जमी हैं कि क्या मंत्रीमंडल में राजद सदस्यों के ज्यादा चेहरे दिख सकते हैं।
आइए एक बार निगाह डालते हैं उन संभावित चेहरों पर जो नीतीश की कैबिनेट में जगह बनाने में सफल हो सकते हैं।
लालू के दोनों लाल बन सकते हैं मंत्री
बिहार विधानसभा चुनावों में सबसे ज्यादा सीटें लालू यादव के राष्ट्रीय जनता दल के हिस्से में आई हैं। ऐसे में कैबिनेट में सबसे ज्यादा दावेदारी भी लालू यादव की ही बनती है।
जिसके बाद पूरी संभावना जताई जा रही है कि उनके दोनों बेटे तेज प्रताप और तेजस्वी यादव को मंत्रीमंडल में जगह देने के साथ साथ अहम विभाग भी दे दिए जाएं।
इसके अलावा राजद कोटे से ही लालू के खास अब्दुल बारी सिद्दीकी, चंद्रिका राय, महेश्वर प्रसाद यादव, आलोक मेहता, फैयाज आलम, सूबेदार दास, ललित यादव और भोला यादव को जगह मिल सकती है।
कांग्रेस से भी कई विधायकों का लग सकता है नंबर
जबकि खुद नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू से पूर्व मंत्री और उनके खास विजय कुमार चौधरी, श्याम रजक, राजीव रंजन सिंह, विजय मिश्र, विजेन्द्र प्रसाद यादव, नरेन्द्र यादव, लेसी सिंह, जय कमार सिंह, श्रवण कुमार और मेवालाल चौधरी भी कैबिनेट मंत्री बन सकते हैं।
वहीं सहयोगी कांग्रेस ने भी 27 सीटें जीतकर नीतीश कुमार पर अपने सदस्यों को मंत्री बनाने का दबाव बढ़ा दिया है। माना जा रहा है कांग्रेस कोटे से नीतीश कुमार प्रदेश अध्यक्ष अशोक चौधरी, विजय शंकर दूबे, अवधेश कुमार, रामदेव राय, अमिता भूषण और सदानंद सिंह को मंत्री बनाया जा सकता है।
हालांकि एक संभावना ये भी जताई जा रही है कि शुरूआत में नीतीश कुमार कुछ मंत्रियों के साथ ही कामकाज संभाले और बाद में गणित सही बैठने पर मंत्रीमंडल का विस्तार कर दिया जाए। असल में नीतीश के सामने चुनौती सहयोगियों को खुश रखने के अलावा जातिगत सामंजस्य बैठाने की भी है जिससे किसी तरह का गलत संदेश न जाने पाए।