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एकबार फिर एनडीए से बाहर होंगे नीतीश, सीट बंटवारे को लेकर जेडीयू का आया बड़ा बयान

Mon, 25 Jun 2018 12:14 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
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बिहार में भारतीय जनता पार्टी के लिए आगामी लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव बहुत कठिन होने वाले हैं। सीट बंटवारे को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। जनता दल यूनाइटेड के नेता संजय सिंह ने एकबार फिर भाजपा को आगाह किया है। संजय सिंह ने कहा कि भाजपा के वह नेता जो हमेशा हेडलाइंस में रहना चाहते हैं उन्हें नियंत्रण में रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि 2014 और 2019 के चुनाव में बहुत बड़ा अंतर है। भाजपा को बहुत अच्छे से पता है कि बिहार में नीतीश कुमार के बिना चुनाव जीतना आसान नहीं होगा। अगर भाजपा को सहयोगी पार्टी की जरूरत नहीं है तो वह बिहार में सभी 40 सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए स्वतंत्र है।  

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अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों के लिए सीट बंटवारे के मुद्दे पर बिहार में भी एनडीए गठबंधन की चारों पार्टियों के बीच दूरी दिखने लगी है। 2015 विधानसभा चुनावों में भाजपा से ज्यादा सीट जीतने वाली जनता दल (यूनाइटेड) सीट बंटवारे में इस परिणाम को आधार बनाने की मांग पर अड़ गई है। हालांकि भाजपा सूत्रों ने इस फॉर्मूले को यह कहकर नकार दिया है कि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस व राजद से गठबंधन करने के कारण जेडीयू को ज्यादा सीट मिली थी।

वहीं दूसरी ओर हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने भी नीतीश कुमार को लेकर बड़ा बयान दिया है। जीतन राम ने कहा है कि अगर नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद का लालच छोड़ देते हैं और महागठबंधन में शामिल होते हैं तब भी 2020 में बिहार का मुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद होंगे।  

 
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बता दें कि सीट बंटवारे को लेकर बिहार में काफी समय से भाजपा और जेडीयू के बीच तनातनी चल रही है। हालांकि एनडीए गठबंधन के सदस्यों के बीच सीट बंटवारे के फॉर्मूले पर औपचारिक वार्ता शुरू होनी अभी बाकी है, लेकिन जेडीयू ने दबाव बनाने के लिए योग दिवस के कार्यक्रमों से दूर रहने के साथ ही साल के अंत में होने वाले मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनावों में अपने उम्मीदवार अलग उतारने की घोषणा कर दी है। साथ ही अगले महीने इस मुद्दे पर रणनीति तय करने के लिए दिल्ली में अपनी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक भी बुलाई है।

भाजपा दे रही 2014 आम चुनाव की दुहाई

जेडीयू की तरफ से उठाई गई मांग को भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने चुनाव से पहले हर पार्टी की तरफ से अपनाया जाने वाला सामान्य राजनीतिक हथकंडा बताया है। उन्होंने जेडीयू को लोकसभा-2014 के चुनाव याद करने की सलाह दी है, जिनमें अकेले दम पर उतरी जेडीयू को 40 में से मात्र 2 लोकसभा सीटों पर जीत मिली थी और अन्य सीटों पर उसके उम्मीदवारों की जमानत भी जब्त हो गई थी। भाजपा ने इन चुनावों में 22 और उसके गठबंधन सहयोगियों में लोजपा ने 6 व रालोसपा ने 3 सीटों पर विजय पताका फहराई थी।
 
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