भाजपा से गठबंधन टूटने के बाद जदयू की नई राह क्या होगी इसे लेकर पार्टी में मंथन जारी है।
बताया जाता है कि नीतीश कुमार और उनके भरोसेमंद नेता लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ तालमेल के हक में हैं, बशर्ते कांग्रेस के नेतृत्व वाली केंद्र की यूपीए सरकार बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग मंजूर कर ले।
वहीं, जदयू के कुछ नेता ममता बनर्जी और नवीन पटनायक के साथ मिलकर फेडरल फ्रंट बनाकर लोकसभा चुनावों के बाद अपने राजनीतिक विकल्प खुले रखने की वकालत कर रहे हैं।
जदयू के महासचिव केसी त्यागी कहते हैं कि अभी हम कांग्रेस-भाजपा से समान दूरी बनाकर चलेंगे। लेकिन धर्मनिरपेक्ष राजनीति के सभी विकल्प खुले रहेंगे।
जदयू वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी का कहना है कि हम बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। नीतीश के संपर्क सूत्र लगातार कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के संपर्क में हैं।
इसका संकेत केंद्रीय इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा के इस बयान से भी मिलता है कि नीतीश अगर कांग्रेस के साथ आ गए तो राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनने से कोई रोक नहीं सकता।
नीतीश के करीबी जदयू सांसद पूर्व आईएएस आरसीपी सिंह बेनी प्रसाद वर्मा के निजी सचिव रह चुके हैं। वहीं जद(यू) सांसद एनके सिंह के रिश्ते प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया से बेहद करीबी हैं।
बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने की नीतीश की मुहिम को दिल्ली में यह दोनों सांसद सिरे चढ़ाने में जुटे हैं। इसके पहले शनिवार को देर रात तक नीतीश कुमार और शरद यादव के बीच इस मुद्दे पर बातचीत होती रही।
सूत्रों के मुताबिक दोनों नेताओं के बीच भावी राजनीतिक विकल्पों को लेकर भी गहन चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने कांग्रेस के साथ दोस्ती या फेडरल फ्रंट बनाने के नफे नुकसान का आकलन भी किया।