जमुई के चर्चित मड़वा पहाड़ छेड़खानी मामले में पुलिस ने अनुसंधान पूरा करते हुए न्यायालय में करीब 300 पन्नों का आरोप पत्र दाखिल कर दिया है। पुलिस ने नंदन यादव और हरेराम यादव समेत कुल सात लोगों को आरोपी बनाया है।
पुलिस अधीक्षक विश्वजीत दयाल ने बताया कि इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ-साथ पॉक्सो एक्ट और आईटी एक्ट के तहत आरोप पत्र समर्पित किया गया है। पुलिस ने अपनी इस जांच में फोरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) की रिपोर्ट तथा तकनीकी साक्ष्यों को मुख्य आधार बनाया है।
वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों से मजबूत की जांच
जांच टीम ने मामले को तकनीकी और वैज्ञानिक तरीके से सुलझाया है। मड़वा पहाड़ इलाके में 14 वर्षीय छात्रा के साथ हुई छेड़खानी और अभद्र व्यवहार के मामले में हर साक्ष्य को बारीक नजर से एकत्र किया गया। पुलिस के अनुसार एफएसएल से मिले वैज्ञानिक साक्ष्य और तकनीकी अनुसंधान के जरिये आरोपियों की संलिप्तता पूरी तरह स्पष्ट हुई है।
इन सभी पुख्ता साक्ष्यों को 300 पन्नों के विस्तृत आरोप पत्र में शामिल किया गया है, ताकि अदालत में आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित हो सके। अब इस मामले की अगली कानूनी प्रक्रिया और सुनवाई न्यायालय के समक्ष चलेगी।
वायरल वीडियो से हुई थी पीड़िता की पहचान
यह पूरी घटना 19 सितंबर 2026 को घटी थी, जब मड़वा पहाड़ के पास सड़क पर एक छात्रा के साथ अभद्रता की गई थी। घटना से जुड़ा वीडियो 21 सितंबर को सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इसके बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल कार्रवाई शुरू की।
वीडियो के जरिये ही पीड़ित छात्रा की पहचान की गई और प्राथमिकी दर्ज हुई। मामले की त्वरित जांच के लिए एक विशेष जांच टीम का गठन किया गया। जांच टीम ने वीडियो में दिखाई दे रहे तीन नाबालिगों को हिरासत में लिया। वहीं, मुख्य आरोपियों की धरपकड़ के लिए अलग-अलग स्थानों पर लगातार छापेमारी की गई।
मुठभेड़ के बाद पकड़े गए थे मुख्य आरोपी
पुलिस ने 22 सितंबर को मुख्य आरोपी नंदन यादव और हरेराम यादव को नदी किनारे झाड़ियों में छिपे होने की सूचना पर घेरा था। इस दौरान पुलिस और आरोपियों के बीच मुठभेड़ जैसी स्थिति बन गई। आरोपी नंदन यादव ने पुलिस टीम पर गोली चला दी, जिसके बाद पुलिस की जवाबी कार्रवाई में उसे गोली लगी। इस कार्रवाई में दूसरा आरोपी हरेराम यादव भी घायल हो गया।
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पुलिस ने दोनों को मौके पर ही हिरासत में ले लिया था। इसके बाद घायल हरेराम यादव को 23 सितंबर को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। दूसरी ओर, नंदन यादव को 28 सितंबर 2026 को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच न्यायालय में प्रस्तुत किया गया था, जहां से अदालत के आदेश पर उसे भी न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।