लाठियां चलाकर पोस्टरों को फाड़ डाला गया।
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प्रदर्शन के लिए मांगों की तख्तियां लेकर खड़े थे
तय कार्यक्रम के तहत मुख्यमंत्री को ईलरा में ही नीरा उत्पादन की प्रक्रिया देखने के बाद पंचायत भवन का उद्घाटन करने के लिए आना था। दोनों स्थलों की दूरी एक किलोमीटर भी नहीं रही होगी। भारी तादाद में लोग यहां जुटकर मुख्यमंत्री का इंतजार कर रहे थे। इसमें सांख्यिकी स्वयंसेवक संघ के अभ्यर्थी समायोजन की मांग के साथ तख्तियां लेकर पहुंचे हुए थे। रोजगार की मांग पर युवाओं की एक टोली उनके साथ जुट रही थी। माना जा रहा है कि संभवत: इसी विरोध की आशंका के मद्देनजर मुख्यमंत्री का काफिला पंचायत भवन की ओर नहीं आया। जैसे ही पता चला कि 'अपरिहार्य कारणों से’ मुख्यमंत्री पंचायत भवन की ओर नहीं आ रहे हैं, विरोध की तैयारी में खड़े युवकों से ज्यादा वह लोग ज्यादा उग्र हो गए जो सुबह से इंतजार में खड़े थे। कम उम्र के लड़कों ने भी कहा कि मुख्यमंत्री आते तो बात रखते, लेकिन वह सुबह से इंतजार कराने के बावजूद नहीं आए।
पंचायत भवन के आसपास किसी नेता या योजना का पोस्टर या होर्डिंग नहीं छोड़ा।
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विरोध पर मुख्यमंत्री सब्र दिखाते रहे हैं
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने विरोध पर भी अबतक सब्र दिखाते रहे हैं, लेकिन विरोध की घटनाओं को इंटेलिजेंस की कमजोरी से जोड़कर देखा जाता रहा है। मुख्यमंत्री पर चप्पल फेंकने का प्रयास से लेकर रंग उड़ेलने तक की कोशिशें हो चुकी हैं। चुनावी सभा में भी उनपर प्याज आदि फेंकने की घटनाएं हो चुकी हैं। पिछले दिनों उप चुनाव के दौरान पर भी रोजगार की मांग करने वालों ने विरोध जताकर हंगामा किया था। इन घटनाओं पर अबतक मुख्यमंत्री सब्र दिखाते रहे हैं और ऐसी घटनाओं को अंजाम देने वालों को माफी भी करते रहे हैं।