“मेरा भाग्य इतना फूटा था कि मैं अपने बेटे का आखिरी बार दीदार भी न कर सकी। वह मुस्कुराते हुए गया था, पर लौटकर सिर्फ उसकी राख की खबर आई।” यह शब्द उस मां के हैं, जिसने इंदौर के भीषण अग्निकांड में अपने 15 साल के कलेजे के टुकड़े कार्तिक को खो दिया। मध्य प्रदेश के इंदौर में बुधवार तड़के करीब 4 बजे लगी आग ने बिहार के किशनगंज के एक ही परिवार के छह चिरागों को हमेशा के लिए बुझा दिया। शुक्रवार को जब किशनगंज में ‘तीया’ की रस्म हुई, तो हर आंख नम थी और हर दिल इस त्रासदी के बोझ से दबा हुआ था।
एक साथ उठीं छह अर्थियां, मातम में डूबा शहर
इंदौर हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि किशनगंज के सेठिया परिवार की तीन पीढ़ियों के सदस्य एक झटके में खत्म हो गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस त्रासदी की सबसे क्रूर विडंबना यह रही कि परिजनों को अपनों का अंतिम चेहरा देखना भी नसीब नहीं हुआ। जब विजय सेठिया के पुत्र विकास और अन्य रिश्तेदार बदहवास होकर इंदौर पहुंचे, तब तक प्रशासन और स्थानीय लोगों को शवों की स्थिति (झुलसने के कारण) देखते हुए उनका अंतिम संस्कार करना पड़ा था।
मेरा मन घबरा रहा था?
मृत कार्तिक की मां मैहर सेठिया ने कहा कि जिस दिन कार्तिक इंदौर जा रहा था तो मेरा मन घबरा रहा था। मैंने सोचा था कि वह पढ़-लिखकर बड़ा अफसर बनेगा, लेकिन नियति ने उसे देखने का आखिरी मौका भी छीन लिया। राजेश जैन, जिन्होंने इस हादसे में अपनी पत्नी रुचिका और बेटे कार्तिक दोनों को खो दिया, उनकी स्थिति देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की रूह कांप उठी। अपनों को खोने का गम तो था ही, लेकिन उन्हें आखिरी बार न देख पाने का मलाल अब ताउम्र सालता रहेगा।
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नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई
स्थानीय लोगों का कहना है कि शुक्रवार सुबह किशनगंज के धर्मशाला रोड स्थित आवास से गांधी घाट के शिव मंदिर तक ‘तीया’ की रस्म के लिए मौन जुलूस निकाला गया। भारी मन और सिसकियों के बीच पूरे समाज ने दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की। इस हादसे ने न केवल एक परिवार को उजाड़ा है, बल्कि पूरे किशनगंज को गहरे शोक में डुबो दिया है। लोग स्तब्ध हैं कि कैसे एक ही पल में हंसता-खेलता परिवार यादों तक सिमट कर रह गया।
इनकी हुई थी मौत
हादसे में किशनगंज के धर्मशाला रोड निवासी विजय सेठिया (65), सुमन सेठिया (60), छोटू सेठिया (22), राशि सेठिया (12), टीनू सेठिया (35) और तनय (8) तथा इंदौर के ब्रजेश्वर कॉलोनी, जहां यह हादसा हुआ निवासी मनोज पुगलिया (65) और उनकी बहू सिमरन (30) शामिल थे।
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कैसे हुआ था हादसा?
पुलिस के अनुसार, कार से घर तक फैली आग ने अंदर रखे गैस सिलेंडरों को अपनी चपेट में ले लिया। इससे एक के बाद एक सिलेंडर फटने लगे। धमाका इतना तेज था कि मकान का एक हिस्सा ढह गया। घर में लगे डिजिटल लॉक खुल नहीं पाए, इसके कारण अंदर सो रहे लोगों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिला।