गुड्डी पाण्डेय और जय मंगल महतो।
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गुड्डी पाण्डेय का था देश की स्वतंत्रता में अहम योगदान
सुंदर सुडौल और हट्टा-कट्टा व्यक्तित्व के धनी गोसी अमनौर गांव निवासी गुड्डी पाण्डेय का भी देश की स्वतंत्रता में अहम योगदान रहा है। कम पढ़े-लिखे होने के बावजूद अंग्रेजी अखबार जरूर खरीदते थे। क्योंकि इनके जेहन में देशभक्ति कूट-कूट कर भरी हुई थी। रोजी-रोटी और कपड़ा की जुगाड़ में गुद्दी पाण्डेय रोजगार की तलाश में नागपुर गए हुए थे। वर्ष 1931 के दौरान नागपुर में साइमन टेलर नामक एक अंग्रेज अधिकारी मंच से सभा को संबोधित कर रहा था। उन्होंने साइमन को जूता चलाकर मार दिया, जिससे वहां भगदड़ मच गई। अंग्रेज सिपाहियों ने पकड़ कर उनकी जमकर पिटाई कर दी, जिस कारण अधमरा हो गए थे। अंत में उन्हें जेल भेज दिया गया। गांधी जी द्वारा डार्विन समझौता के छः माह बाद इन्हें छोड़ दिया गया। सन 1932 में सेनानियों द्वारा स्वराज आश्रम में एक सभा का आयोजन कर दिघवारा में अंग्रेज कलक्टर को जूते के माला पहनाने का लोगों ने निर्णय लिया गया। गुद्दी पाण्डेय ने इस कार्य को करने के लिए खुद बीड़ा उठाया। अंग्रेज कलक्टर काफी अत्याचारी था, हर समय लोगों पर जुर्म किया करता था। उन्होंने दिघवारा जाकर अंग्रेज कलक्टर को उनके ऑफिस में घुसकर जूते का माला पहनाकर हिदुस्तान जिंदाबाद का नारा लगाया। इससे क्रोधित होकर अंग्रेज सिपाही बुरी तरह मार पीट कर अधमरा कर इन्हें फिर से जेल भेज दिया था।
जय मंगल महतो की शहादत को याद नही करना दुर्भाग्य की बात
अंग्रेज सिपाहियों ने अपने साथी की मौत से आक्रोशित होकर सैनिक समूह को उतारने के बाद अमनौर गांव को चारों तरफ से घेरने लगे, तभी हमारे पूर्वजों ने मही नदी के पुल को तोड़ डाला। इसके बावजूद भी 20 अगस्त को अंग्रेज नदी के पार आना चाह रहे थे। जैसे ही यह खबर जय मंगल महतो के कानों में पड़ी तो अकेले ही तीर और कमान लेकर अंग्रेजो से लोहा लेने निकल पड़े। हालांकि कई अंग्रेज इनके तीर से घायल भी हुए थे। लेकिन अंत में अंग्रेजो द्वारा चलाई गई गोली का शिकार होकर अपने को भारत भूमि की रक्षा के लिए शहीद हो गए। जयमंगल महतो ने अपनी जान गवां कर अंग्रेजो से गांव की रक्षा किया था। देश के लिए शहादत देने वाले का नाम प्रखंड मुख्यालय के शिला पट्ट पर अंकित नही होना दुर्भाग्य है। जबकि इस शिला पट्ट पर स्वतंत्रता सेनानी का नाम दर्ज किया गया है।
छत पर लगे मशीनगन से बरसाई थीं गोलियां
मढ़ौरा में शहीद स्मारक का उद्घाटन करने आए तत्कालीन मुख्यमंत्री दरोगा प्रसाद राय ने कहा था कि रामजीवन सिंह और अमनौर के जय मंगल महतो की शहादत से उपजे जनाक्रोश की गूंज लंदन की संसद तक गुंजी थी। वहीं प्रधानमंत्री चर्चिल ने कहा था कि मढ़ौरा में जिस सिपाहियों को मार कर उनकी लाशें तक खपा दी गई थी, उस मढ़ौरा में मशीन गन लगाकर 19 किमी की रेडीयंस को मानव विहीन बना दिया जाए। वैसे स्थानीय ग्रामीणों द्वारा कहा जाता था कि मढ़ौरा मार्टन फैक्ट्री के छत पर मशीन गन लगी थी जो नाचते हुए गोलियां बरसाया करती थी। अगस्त क्रांति के दौरान अमनौर हरनारायण के जगनाथ सिंह, परसुरामपुर के बासुदेव नारायण सिंह, पंडित राम कुमार तिवारी, राजेंद्र दुबे, शीतल सिंह और भोला तिवारी का भी सराहनीय योगदान रहा है।