आर्थिक सर्वे की रिपोर्ट।
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94.42 लाख परिवारों को एक प्रस्ताव से साधा
आरक्षण बढ़ाने के प्रस्ताव के जरिए मुख्यमंत्री ने गैर-आरक्षित वर्ग के सभी वोटरों को साधने की कोशिश की, लेकिन उससे भी ज्यादा बड़ा दांव जातीय जनगणना में सामने आए 94 लाख 42 हजार 786 परिवारों को आर्थिक मदद के प्रस्ताव से खेला गया। जातीय जनगणना में छह हजार रुपये तक मासिक आय वाले परिवारों की यह संख्या है। कुल 2 करोड़ 76 लाख 68 हजार 930 परिवारों में से 34.13 प्रतिशत को गरीब माना गया है। इन गरीबों को 2 लाख रुपये की मदद किश्तों में दी जाएगी, ताकि वह अपना कोई रोजगार कर पाएं। सबसे बड़ी बात यह है कि इनमें से 10.85 लाख सामान्य वर्ग से हैं। इसमें सबसे ज्यादा संख्या ब्राह्मण परिवारों की है, जबकि सबसे ज्यादा प्रतिशत भूमिहारों का है। इसमें मुसलमानों की अगड़ी जाति शेख भी शामिल है। इन परिवारों को आर्थिक मदद की योजना चुनाव में तुरुप का पत्ता साबित हो सकती है।