पटना हाईकोर्ट ने नीतीश सरकार को बड़ा झटका देते हुए 21 जनवरी को आयोजित होने वाली मानव श्रृंखला बनाने को लेकर नया आदेश जारी किया है। कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि राज्य सरकार मानव श्रृंखला बनाने में बच्चे की मदद बगैर उनके अभिभावक की सहमति के नहीं ले सकती।
गौरतलब है कि बिहार सरकार ने राज्य में दहेज प्रथा और बाल विवाह के खिलाफ जागरूक करने के लिए मानव श्रृंखला बनाने की बात कही थी।
याचिकाकर्ता शिव प्रकाश राय द्वारा पटना उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की गई थी। जिसमें इस
मानव श्रृंखला में छात्रों और शिक्षकों की भागीदारी पर सवाल उठाए गए हैं। उन्होंने इस कारण का हवाला दिया कि विद्यार्थियों को जबरदस्ती इस श्रृंखला का हिस्सा बनाना मानवाधिकार का उल्लंघन करना है, जबकि शिक्षकों को चुनाव और जनगणना के अलावा अन्य किसी भी काम में शामिल नहीं किया जा सकता है।
मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन और न्यायमूर्ति अनिल कुमार उपाध्याय की खंडपीठ के समक्ष पेश हुए एडवोकेट जनरल ललित किशोर ने अदालत को बताया कि 'मुख्य सचिव ने पहले ही 8 जनवरी को आदेश जारी कर दिए थे कि कक्षा -5 तक कोई भी बच्चा इस कार्यक्रम में भाग नहीं लेगा। लेकिन कक्षा पांच से आगे वाले छात्रों की भागीदारी को सुनिश्चित किया जाए। इस श्रृंखला में शिक्षकों का होना भी जरूरी है क्योंकि वे बच्चों को दिशानिर्देश देंगे और उन्हें सुरक्षित घर पहुंचाने की जिम्मेदारी भी लेंगे। उन्होंने अदालत को बताया कि भागीदारी पूरी तरह से स्वैच्छिक होगी।' अब मामले की सुनवाई चार हफ्ते बाद होगी।