बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) को बुधवार को तब झटका लगा जब उसके प्रदेश अध्यक्ष वृषण पटेल और राष्ट्रीय प्रवक्ता दानिश रिजवान ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया और एक दूसरे के खिलाफ तीखे हमले किये। रिजवान द्वारा इस्तीफा देने और उसकी प्रति सोशल मीडिया पर साझा करने तथा पटेल पर पार्टी धनराशि का दुरुपयोग करने का आरोप लगाने के कुछ ही देर बाद प्रदेश अध्यक्ष ने भी यह घोषणा की कि वह भी हम छोड़ रहे हैं।
पटेल ने कहा कि वह मांझी द्वारा पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के धरने की आलोचना किये जाने से निराश हैं क्योंकि यह महागठबंधन के रुख के खिलाफ है। पटेल ने यह भी कहा कि वह मांझी द्वारा राष्ट्रीय प्रवक्ता के खिलाफ कार्रवाई करने में असफल रहने से भी निराश हैं जो राजग से नजदीकी बढ़ा रहे हैं। रिजवान ने पार्टी से इस्तीफा देने से तीन दिन पहले राहुल गांधी की पटना रैली को असफल बताया था जिसमें मांझी भी शामिल हुए थे। रिजवान ने इसके साथ ही हम नेता मांझी से कांग्रेस के साथ गठबंधन पर पुनर्विचार करने का आग्रह भी किया था।
मांझी ने अपनी पार्टी में हुए इस घटनाक्रम पर अभी तक कोई टिप्पणी नहीं की है। उन्होंने रिजवान और हम के एक अन्य प्रवक्ता विजय यादव की टिप्पणियों से असहमति जतायी है और कहा है कि मैं पता लगाऊंगा और यदि मेरी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने वास्तव में ऐसा बयान दिया है तो हो सकता है कि उन्हें अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़े।
पटेल ने गांधी की रैली पर रिजवान की टिप्पणी की आलोचना की थी और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। रिजवान ने मांझी को लिखे अपने इस्तीफे में कांग्रेस की रैली के मामले का कोई उल्लेख नहीं किया लेकिन यह कहा कि मैं हम को अपना घर मानता हूं और प्रदेश अध्यक्ष द्वारा उसे दीमक की तरह खाने पर मूक दर्शक नहीं बना रह सकता।