कटिहार के इस स्कूल में प्राइमरी के सभी बच्चों को एक ही कक्षा में बैठाया जाता है। इन बच्चों को पढ़ाने के लिए यहां तीन अध्यापक हैं, इसमें एक समय में दो अध्यापक बच्चों को पढ़ाते हैं और तीसरा बच्चों पर नजर रखता है।
बिहार में सरकारी स्कूलों में बेहतर शिक्षा को लेकर नीतीश सरकार चाहे लाख दावे भले ही क्यों ना कर लेकिन असली हकीकत कुछ और ही है। यहां, कटिहार के एक सरकारी स्कूल का एक वीडियो सामने आया है जो सरकारी स्कूलों की हकीकत बयां करता है। ये वीडियो कटिहार के मनिहारी प्रखंड के प्राइमरी स्कूल का है। इसमें देखा जा सकता है कि इस सरकारी स्कूल में एक ही ब्लैकबोर्ड पर हिंदी और उर्दू पढ़ाई जा रही है।
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इस बारे में आदर्श मिडिल स्कूल की सहायक शिक्षक कुमारी प्रियंका ने बताया कि उर्दू प्राइमरी स्कूल को 2017 में शिक्षा विभाग द्वारा हमारे स्कूल में स्थानांतरित कर दिया गया था। हमारे स्कूल में पहले से ही कम कमरे थे और जब उर्दू प्राइमरी स्कूल को शिफ्ट किया गया तो प्राइमरी स्कूल के संचालन के लिए केवल एक कमरा उपलब्ध कराया गया।
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आदर्श मिडिल स्कूल की सहायक शिक्षक कुमारी प्रियंका ने बताया कि हमारे स्कूल में पर्याप्त क्लासरूम नहीं हैं और यही कारण है कि हम एक ही कमरे में छात्रों को पढ़ाते हैं। उन्होंने बताया कि एक ही ब्लैकबोर्ड के एक आधे हिस्से पर हिंदी पढ़ाई जाती है और दूसरी तरफ दूसरे शिक्षक द्वारा उर्दू पढ़ाई जाती है।
जानकारी के मुताबिक, इस स्कूल में प्राइमरी के सभी बच्चों को एक ही कक्षा में बैठाया जाता है। इन बच्चों को पढ़ाने के लिए यहां तीन अध्यापक हैं, इसमें एक समय में दो अध्यापक बच्चों को पढ़ाते हैं और तीसरा बच्चों पर नजर रखता है। वहीं, ग्रामीणों का कहना है कि इसे लेकर कई बार शिकायत की गई है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।